NSE का बड़ा फैसला: Index F&O की बदल गई ऑर्डर लिमिट, जानें अब कितने शेयर ही डाल पाएंगे

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AuthorMehul Desai|Published at:
NSE का बड़ा फैसला: Index F&O की बदल गई ऑर्डर लिमिट, जानें अब कितने शेयर ही डाल पाएंगे

National Stock Exchange (NSE) ने 1 सितंबर 2026 से इंडेक्स फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) के लिए नए 'क्वांटिटी फ्रीज' नियम लागू कर दिए हैं। रिस्क मैनेजमेंट को मजबूत करने के लिए अब एक ऑर्डर की मैक्सिमम साइज पर लगाम लगा दी गई है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए 'क्वांटिटी फ्रीज' (Quantity Freeze) लिमिट्स में बदलाव किया है, जो 1 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गए हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बाजार में जोखिम को कम करना और सिस्टम की स्थिरता को बनाए रखना है।

नई ऑर्डर लिमिट्स (New Order Size Limits)

नए नियमों के तहत अलग-अलग इंडेक्स के लिए लिमिट्स इस प्रकार तय की गई हैं:

  • Bank Nifty और Nifty Next 50: 600 यूनिट्स प्रति ऑर्डर।
  • Nifty और FinNifty: 1,800 यूनिट्स प्रति ऑर्डर।
  • Midcap Nifty: 2,800 यूनिट्स प्रति ऑर्डर।
  • NiftyFPI: 8,500 यूनिट्स प्रति ऑर्डर।

ये सीमाएं एक सुरक्षा कवच (Safety Mechanism) की तरह काम करती हैं। यदि कोई ट्रेडर या एल्गोरिदम इस तय सीमा से ज्यादा का ऑर्डर डालता है, तो एक्सचेंज का सिस्टम उसे ऑटोमैटिक रिजेक्ट कर देगा। इससे 'फैट फिंगर' (Fat Finger) गलतियों—यानी गलती से बहुत बड़ी क्वांटिटी टाइप हो जाना—से बचा जा सकेगा और एक्सचेंज के मैचिंग इंजन पर लोड भी कंट्रोल में रहेगा।

ट्रेडर्स पर असर (Impact on Trading)

खास बात यह है कि यह पाबंदी सिर्फ एक 'सिंगल ऑर्डर' के साइज पर है, न कि आपके कुल पोजीशन लिमिट या ओपन इंटरेस्ट पर। जो निवेशक बड़े वॉल्यूम में ट्रेड करते हैं, उन्हें अब अपनी कुल पोजीशन को छोटे-छोटे ऑर्डर्स में बांटकर (Slicing) एग्जीक्यूट करना होगा।

जो लोग एल्गो ट्रेडिंग (Algo Trading) का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें अपने सॉफ्टवेयर को इन नए पैरामीटर्स के साथ अपडेट करना बेहद जरूरी है। यदि आप अपनी ट्रेडिंग स्ट्रेटजी में बदलाव नहीं करते हैं, तो मार्केट ऑवर्स के दौरान ऑर्डर रिजेक्ट हो सकते हैं, जिससे आपकी ट्रेड एग्जीक्यूट होने में देरी या परेशानी आ सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.