National Stock Exchange (NSE) ने प्री-ओपन सेशन में बड़ा बदलाव किया है। अब 7 सितंबर से मार्केट ऑर्डर्स सिर्फ सुबह 9:00 से 9:05 बजे तक ही मान्य होंगे, जिसके बाद सिर्फ लिमिट ऑर्डर्स ही स्वीकार किए जाएंगे।
नया 15-मिनट का फ्रेमवर्क
NSE ने इस 15-मिनट के प्री-ओपन सेशन को अब अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया है। 9:00 AM से 9:05 AM तक आप सामान्य तरीके से मार्केट और लिमिट, दोनों ऑर्डर्स डाल सकेंगे। लेकिन, 9:05 AM के बाद सिस्टम सभी मार्केट ऑर्डर्स को रिजेक्ट कर देगा। इसके बाद 9:05 AM से 9:10 AM के बीच ट्रेडर्स को सिर्फ 'लिमिट ऑर्डर' (एक निश्चित कीमत पर खरीदारी या बिक्री) ही डालना होगा।
इस प्रक्रिया के दूसरे चरण में एक 'रैंडम क्लोजर' सिस्टम जोड़ा गया है। इसके बाद 9:10 AM से 9:12 AM तक ऑर्डर्स की मैचिंग होगी और प्राइस डिस्कवरी प्रक्रिया पूरी होगी। अंत में 9:12 AM से 9:15 AM तक का समय ट्रांजिशन पीरियड होगा, ताकि 9:15 AM से शुरू होने वाली रेगुलर ट्रेडिंग सुचारू रूप से चल सके।
निवेशकों के लिए यह क्यों है जरूरी?
यह बदलाव SEBI के क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की तर्ज पर लाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य ओपनिंग के समय होने वाली अनचाही अस्थिरता (Volatility) को कम करना है। अक्सर ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव या बड़ी खबरों के चलते सुबह मार्केट खुलते ही भारी हलचल होती है, जिसे लिमिट ऑर्डर्स के जरिए नियंत्रित करने की कोशिश की जाएगी।
यह नियम मुख्य बोर्ड के शेयरों के साथ-साथ SME सिक्योरिटीज, REITs और InvITs पर भी लागू होगा। ध्यान रहे कि स्टॉप लॉस (SL), इमीडिएट या कैंसिल (IOC) और डिस्क्लोज्ड क्वांटिटी (DQ) जैसे स्पेशल ऑर्डर्स प्री-ओपन सेशन में पहले की तरह प्रतिबंधित रहेंगे।
ट्रेडर्स को क्या ध्यान रखना होगा?
ट्रेडर्स को सबसे बड़ा बदलाव टाइमिंग में करना होगा। यदि आप मार्केट ऑर्डर का उपयोग करते हैं, तो सुनिश्चित करें कि आपका ट्रेड शुरुआती 5 मिनट में पूरा हो जाए। 9:05 AM के बाद मार्केट ऑर्डर डालने पर ट्रांजेक्शन रिजेक्ट हो जाएगा, इसलिए आपको अपनी रणनीति में 'लिमिट ऑर्डर' को शामिल करना होगा।
