NSE के निवेशकों के लिए तीसरा दिन चुनौतीपूर्ण रहा। कंपनी का शेयर अपने **₹1,785** के इश्यू प्राइस से गिरकर **₹1,761** के स्तर पर आ गया है। बाजार में जारी उठापटक और ग्लोबल वैल्यूएशन की तुलना में महंगे प्रीमियम के चलते बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
NSE के शेयरों में सोमवार को सुस्ती देखी गई, जिससे यह अपने ₹1,785 के लिस्टिंग प्राइस से नीचे लुढ़क गया। यह गिरावट तब आई है जब भारतीय शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल है और निफ्टी 50 सात महीने के निचले स्तर की ओर बढ़ रहा है।
वैल्यूएशन पर उठा सवाल
मैक्वेरी (Macquarie) की रिपोर्ट के अनुसार, NSE का स्टॉक अपने 2029 के अनुमानित मुनाफे के 30 गुना पर ट्रेड कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक्सचेंज स्टॉक्स का औसत वैल्यूएशन 18 गुना है, यानी NSE का प्रीमियम उनके मुकाबले 65% ज्यादा है। निवेशकों को इसी ऊंचे वैल्यूएशन और बाजार की वर्तमान अस्थिरता के बीच संतुलन बैठाने में मुश्किल हो रही है।
वॉल्यूम का दबाव
कंपनी के सामने वॉल्यूम से जुड़ी चुनौतियां भी खड़ी हैं। कैश इक्विटी और मार्जिन ट्रेडिंग वॉल्यूम पर दबाव देखने को मिला है। इसके अलावा, क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में हुए हालिया बदलावों ने दैनिक ट्रेडिंग एक्टिविटी को भी प्रभावित किया है। हालांकि, ग्लोबल डेरिवेटिव्स मार्केट में NSE का दबदबा अभी भी कायम है।
मैनेजमेंट का रुख
CEO आशीष कुमार चौहान का मानना है कि डेरिवेटिव्स सेक्टर में रेगुलेटरी सख्ती का सबसे कठिन दौर पीछे छूट चुका है। इक्विटी ऑप्शंस सेगमेंट में बाजार हिस्सेदारी वापस आने और कमोडिटी ट्रेडिंग में बढ़त के शुरुआती संकेत भी मिले हैं। अब आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि क्या ऑपरेशनल सुधार स्टॉक के प्रीमियम वैल्यूएशन को सही साबित कर पाएंगे।
