National Stock Exchange (NSE) के शेयर अब 24 सितंबर से Metropolitan Stock Exchange (MSE) पर 'permitted-to-trade' कैटेगरी के तहत उपलब्ध होंगे। इस कदम से अनलिस्टेड शेयरों की लिक्विडिटी और प्राइस डिस्कवरी में सुधार होने की उम्मीद है।
क्या है 'Permitted-to-trade' का मतलब?
निवेशकों को यह स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि यह NSE की आधिकारिक लिस्टिंग नहीं है। 'Permitted-to-trade' कैटेगरी का मतलब है कि NSE को MSE के साथ कोई फॉर्मल लिस्टिंग एग्रीमेंट साइन करने या लिस्टेड कंपनियों जैसे सख्त डिस्क्लोजर नॉर्म्स का पालन करने की जरूरत नहीं होगी। इसके चलते, NSE को अपने रेगुलेटर Securities and Exchange Board of India (SEBI) की तरह MSE को भारी-भरकम फाइलिंग्स देने की अनिवार्यता नहीं है।
क्यों लिया गया यह कदम?
अब तक NSE के शेयर अनलिस्टेड मार्केट या प्राइवेट ब्रोकरेज के जरिए ट्रेड होते थे, जहां प्राइस ट्रांसपेरेंसी की कमी बनी रहती थी। MSE पर उपलब्धता से निवेशकों को एक बेहतर और व्यवस्थित प्लेटफॉर्म मिलेगा, जिससे शेयरों की लिक्विडिटी बढ़ने की संभावना है।
निवेशकों के लिए सावधानी
NSE ने साफ किया है कि उसने अपने ही प्लेटफॉर्म पर अपने शेयर ट्रेड करने की अनुमति नहीं मांगी है। चूँकि NSE अभी भी एक अनलिस्टेड एंटिटी है, इसलिए निवेशकों को किसी भी बड़े फैसले से पहले NSE की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स और कॉरपोरेट अनाउंसमेंट्स को क्रॉस-चेक जरूर करना चाहिए। अनलिस्टेड मार्केट में निवेश के अपने जोखिम होते हैं, जिनमें पारदर्शिता और लिक्विडिटी की चुनौतियां प्रमुख हैं। आने वाले समय में MSE पर होने वाले ट्रेड वॉल्यूम पर नजर रखना ही समझदारी होगी।
