NSE का बड़ा दांव: 18 शेयरों पर 15% मार्जिन बढ़ाया, सोना-चांदी पर राहत!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
NSE का बड़ा दांव: 18 शेयरों पर 15% मार्जिन बढ़ाया, सोना-चांदी पर राहत!
Overview

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने एक बड़े फैसले में 18 चुनिंदा इक्विटी डेरिवेटिव्स (F&O) स्टॉक्स पर मार्जिन को **15%** तक बढ़ा दिया है। यह कदम मार्च सीरीज से लागू होगा और इसका मकसद उन शेयरों में क्लाइंट कंसंट्रेशन को कंट्रोल करना है। वहीं, सोना और चांदी के फ्यूचर्स पर लगे मार्जिन हाइक्स को वापस ले लिया गया है।

NSE का रेगुलेटरी एक्शन: 18 शेयरों पर सख्त हुई मार्जिन की मार

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने बाजार में जोखिम को कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। एक्सचेंज ने 18 ऐसे स्टॉक्स के फ्यूचर्स और ऑप्शन्स (F&O) सेगमेंट में 15% का अतिरिक्त एक्सपोजर मार्जिन लगाने का फैसला किया है, जो मार्च सीरीज से लागू होगा। इस नियम के तहत उन शेयरों को निशाना बनाया गया है जहां टॉप 10 क्लाइंट्स का मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट (MWPL) में 20% से ज्यादा का हिस्सा है। NSE का कहना है कि यह अतिरिक्त मार्जिन तीन महीने के रोलिंग डेटा के आधार पर लगाया जाएगा और हर महीने इसकी समीक्षा होगी। अगर किसी स्टॉक पर पहले से ही कोई अतिरिक्त सर्विलांस मार्जिन लगा हुआ है, तो दोनों में से जो भी ज्यादा होगा, उसे लागू किया जाएगा।

इस सख्ती का असर जिन प्रमुख कंपनियों पर पड़ा है, उनमें Vodafone Idea, Aurobindo Pharma, Bandhan Bank, Glenmark Pharmaceuticals, NMDC, RBL Bank, Steel Authority of India Limited (SAIL), DLF, और Manappuram Finance शामिल हैं। इनके अलावा Aditya Birla Capital, Container Corporation of India (Concor), Crompton Greaves Consumer Electricals, JSW Energy, LIC Housing Finance, NBCC (India), Patanjali Foods, और Indus Towers भी इस लिस्ट में हैं।

सोना-चांदी पर मिली राहत: क्या है वजह?

जहां एक तरफ इक्विटी डेरिवेटिव्स पर मार्जिन बढ़ाया गया है, वहीं NSE ने कमोडिटी फ्यूचर्स पर लगे अतिरिक्त मार्जिन को हटा दिया है। 19 फरवरी 2026 से गोल्ड फ्यूचर्स पर लगने वाला 3% और सिल्वर फ्यूचर्स पर लगने वाला 7% का अतिरिक्त मार्जिन खत्म कर दिया गया है। यह फैसला हाल ही में सोने में लगभग 20% और चांदी में भारी गिरावट के बाद आया है। मार्जिन हटाने से ट्रेडर्स के लिए कैपिटल की जरूरत कम होगी, जिससे इन सेगमेंट में लिक्विडिटी बढ़ने और ट्रेडिंग एक्टिविटी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह रणनीति दिखाती है कि NSE इक्विटी में जहां जोखिम केंद्रित है, वहां लगाम लगा रही है, वहीं कमोडिटीज में बाजार को सहारा देने की कोशिश कर रही है।

गहराई से विश्लेषण: इन शेयरों पर क्यों पड़ी मार?

NSE की यह चाल सट्टेबाजी को कम करने और सिस्टमैटिक रिस्क को मैनेज करने के लिए है। जिन 18 शेयरों पर यह मार्जिन बढ़ाया गया है, वहां ट्रेडर्स के लिए ट्रेडिंग महंगी हो सकती है और लिक्विडिटी भी कम हो सकती है, जिसका असर शेयर की कीमतों पर पड़ सकता है। ऐसा पहले भी कई बार हुआ है, जैसे अप्रैल 2024 और जनवरी 2026 में भी ऐसे कदम उठाए गए थे।

कुछ खास शेयरों की बात करें तो, Vodafone Idea का P/E ratio लगभग -4.24 है और इसका डेट-टू-इक्विटी ratio -2.83 के आसपास है, जो काफी ज्यादा कर्ज दिखाता है। फार्मा सेक्टर की Aurobindo Pharma और Glenmark Pharmaceuticals का P/E ratio 18.6 से 53.9 के बीच है, जो सेक्टर के औसत से ज्यादा है। SAIL का P/E लगभग 33 है, जो सेक्टर एवरेज 29.3 से ऊपर है। JSW Energy का P/E करीब 33-38 है, जो सेक्टर एवरेज 36.6 से महंगा माना जा रहा है। LIC Housing Finance का P/E सिर्फ 5.2 है, जो सेक्टर एवरेज 29.76 से काफी कम है, लेकिन कंपनी को गिरती प्रॉफिटेबिलिटी और टाइट लिक्विडिटी जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। NBCC (India) का P/E करीब 40 है, जो सेक्टर एवरेज 16.53 से बहुत ऊपर है। Patanjali Foods का P/E करीब 35 है, जो इंडस्ट्री बेंचमार्क 13.75 से काफी ज्यादा है।

निवेशक क्या करें?

इन 18 शेयरों पर बढ़ा हुआ मार्जिन क्लाइंट्स की बड़ी पोजीशन पर एक 'रेड फ्लैग' की तरह है। Vodafone Idea की कमजोर फाइनेंशियल पोजीशन और ज्यादा कर्ज इसे जोखिम भरा बना सकता है। NBCC (India), JSW Energy और Patanjali Foods जैसी कंपनियों के लिए उनका महंगा वैल्यूएशन और 'पुअर' क्वालिटी/मैनेजमेंट रेटिंग, आगे चलकर दिक्कतें खड़ी कर सकती हैं। Aurobindo Pharma और Glenmark Pharmaceuticals जैसी कंपनियों की सेल्स ग्रोथ में अस्थिरता और कम रिटर्न ऑन इक्विटी, F&O मार्केट में टाइट कंडीशंस के चलते और बढ़ सकती है। LIC Housing Finance की गिरती प्रॉफिटेबिलिटी और लिक्विडिटी की दिक्कतें इसे और कमजोर बना सकती हैं। बाकी शेयरों के लिए, ट्रेडिंग कॉस्ट का बढ़ना और लिक्विडिटी का कम होना मुख्य जोखिम है। यह कदम सट्टेबाजी को कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन यह देखना होगा कि कहीं इससे मार्केट की लिक्विडिटी बुरी तरह प्रभावित न हो।

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