मुंबई में संपन्न हुए 7वें ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में बड़े रेगुलरिटी बदलावों का ऐलान हुआ है। NSE के CEO ने IPO को लेकर स्थिति साफ की है, वहीं RBI ने फिनटेक सेक्टर के लिए दूसरे SRO को मान्यता दी है।
मुंबई में आयोजित 7वें ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026 में मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर और फिनटेक सेक्टर के लिए कई बड़े फैसले लिए गए हैं। निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चर्चा का विषय नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का बहुप्रतीक्षित IPO रहा।
NSE IPO: गवर्नेंस पर सफाई
NSE के एमडी और CEO आशीष कुमार चौहान ने IPO को लेकर जारी सस्पेंस को खत्म करते हुए स्पष्ट किया कि एक्सचेंज अपने ही प्लेटफॉर्म पर अपने शेयर ट्रेड नहीं करेगा। उन्होंने इसके पीछे गवर्नेंस संबंधी चिंताओं और हितों के टकराव (Conflict of interest) का हवाला दिया है। मार्केट जानकारों के अनुसार, यह IPO मुख्य रूप से 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) हो सकता है, जिसका साइज ₹22,500 करोड़ से ₹23,500 करोड़ के बीच रहने का अनुमान है।
RBI का बड़ा कदम
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फिनटेक इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए 'यूनाइटेड फिनटेक फोरम' को दूसरे सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गेनाइजेशन (SRO) के रूप में मान्यता दी है। इसका मकसद इंडस्ट्री के मानकों को बेहतर बनाना है। इसके साथ ही, RBI और SEBI ने मिलकर कॉर्पोरेट बॉन्ड के टोकनाइजेशन की नई पहल शुरू की है, जिसमें सेटलमेंट सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के जरिए किए जाएंगे।
भविष्य की राह
रेगुलेटर्स ने साफ कर दिया है कि फिनटेक कंपनियों को अब केवल 'रेगुलेटरी गैप्स' या आर्बिट्रेज के भरोसे बिजनेस नहीं बनाना चाहिए। अब पूरा फोकस सस्टेनेबल और कंप्लायंस-केंद्रित ऑपरेशंस पर है। निवेशकों के लिए आने वाले समय में SRO के नए फ्रेमवर्क और NSE IPO की टाइमलाइन पर नजर रखना सबसे महत्वपूर्ण होगा।
