National Stock Exchange (NSE) के बहुप्रतीक्षित IPO का प्राइस बैंड आज, 11 सितंबर 2026 को घोषित होने की उम्मीद है। BSE पर लिस्टिंग तो तय है, लेकिन कंपनी के अपने ही प्लेटफॉर्म पर शेयर ट्रेड करने के प्रस्ताव ने बाजार में नई बहस छेड़ दी है।
लिस्टिंग के नियम और टकराव
SEBI के नियमों के मुताबिक, कोई भी एक्सचेंज अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं हो सकता। इसी कारण NSE अपने शेयरों को BSE पर लिस्ट करेगा ताकि रेगुलेटरी स्वतंत्रता और हितों के टकराव (Conflict of Interest) को रोका जा सके। निगरानी और शिकायत निवारण जैसे महत्वपूर्ण कामों में पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए यह नियम अनिवार्य है।
'Permitted-to-Trade' (PTT) पर घमासान
विवाद का मुख्य कारण NSE का वह प्रस्ताव है जिसमें वह चाहता है कि उसके शेयर अपने ही प्लेटफॉर्म पर 'परमिटेड-टू-ट्रेड' रूट के जरिए ट्रेड हों।
- पक्ष: समर्थकों का कहना है कि इससे NSE के करोड़ों ट्रेडर्स को शेयर खरीदने में आसानी होगी और लिक्विडिटी बेहतर रहेगी।
- विपक्ष: BSE और अन्य जानकारों का मानना है कि इससे वही हितों का टकराव पैदा होगा जिसे सेबी रोकने की कोशिश कर रही है। अगर NSE खुद ही अपने स्टॉक की ट्रेडिंग और सर्विलांस संभालेगी, तो इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
इश्यू का आकार और वैल्यूएशन
यह देश के सबसे बड़े पब्लिक ऑफर्स में से एक होगा। यह पूरा IPO 14.89 करोड़ शेयरों का 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) है। इश्यू का कुल साइज ₹23,000 करोड़ से ₹30,000 करोड़ के बीच हो सकता है और शेयर की कीमत ₹1,700 से ₹2,000 के दायरे में रहने का अनुमान है।
निवेशकों की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि क्या SEBI इस PTT रूट को मंजूरी देगा या ट्रेडिंग सिर्फ BSE तक सीमित रहेगी।
