IPO की राह आसान, पर नतीजों में बड़ा सवाल
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के पब्लिक होने का इंतजार आखिरकार खत्म होने की कगार पर है। मार्केट रेगुलेटर SEBI ने NSE के IPO के लिए अपना अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर दिया है, जो इसके पब्लिक लिस्टिंग की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस हरी झंडी के बाद, NSE बोर्ड 6 फरवरी, 2026 को एक महत्वपूर्ण बैठक करेगा, जिसमें IPO प्रक्रिया को औपचारिक रूप से शुरू करने और इसके लिए एक विशेष IPO कमेटी के गठन पर फैसला लिया जाएगा। यह संभावित रूप से भारतीय बाजार के सबसे बड़े IPO में से एक हो सकता है। फरवरी 2026 की शुरुआत में, अनलिस्टेड NSE का शेयर लगभग ₹2,075 पर ट्रेड कर रहा था, जिससे इसका अनुमानित मार्केट कैप ₹5.13 लाख करोड़ से ऊपर पहुंच गया था।
IPO की इस प्रगति के बीच, NSE के फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के वित्तीय नतीजे एक मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। कंसोलिडेटेड कुल आय (consolidated total income) में पिछली तिमाही (QoQ) की तुलना में 6% का इजाफा हुआ और यह ₹4,395 करोड़ तक पहुंच गई। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण इक्विटी कैश और डेरिवेटिव सेगमेंट में बढ़े ट्रेडिंग वॉल्यूम से मिली ट्रांजैक्शन चार्ज आय में 9% की तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) वृद्धि है, जो ₹3,033 करोड़ रही। इसी तरह, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (PAT) में भी तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) 15% की बढ़त दर्ज हुई और यह ₹2,408 करोड़ पर आ गया।
हालांकि, ये तिमाही आंकड़े पिछली साल की समान अवधि (YoY) की तुलना में निराशाजनक हैं। Q3 FY25 में ₹4,807 करोड़ की कंसोलिडेटेड आय की तुलना में इस साल 9% की गिरावट आई है। वहीं, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (PAT) में तो 37% की बड़ी सेंध लगी है, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹3,834 करोड़ था।
डेरिवेटिव्स के उतार-चढ़ाव और आगे की राह
तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आय में वृद्धि का मुख्य कारण ट्रेडिंग एक्टिविटी में तेजी रही। कैश मार्केट में औसत दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम (ADTV) में 3%, इक्विटी फ्यूचर्स ADTV में 8% और इक्विटी ऑप्शंस ADTV में 15% की तिमाही बढ़ोतरी देखी गई। एक्सचेंज ने खर्चों को भी प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया, जिसके चलते कंसोलिडेटेड कुल खर्च (consolidated total expenditure) पिछली तिमाही (QoQ) से 48% घटकर ₹1,234 करोड़ रह गया। हालांकि, इसमें नए श्रम कानूनों के लागू होने के कारण ₹126 करोड़ का एकमुश्त ग्रेच्युटी प्रोविजन (one-time gratuity provision) भी शामिल था। स्टैंडअलोन आधार पर, NSE ने 59% का मजबूत PAT मार्जिन दर्ज किया। 9 महीने (9M) FY26 के लिए, कंसोलिडेटेड PAT ₹7,431 करोड़ रहा।
बाजार में चिंता का विषय डेरिवेटिव्स सेगमेंट पर संभावित नियामक बदलावों का असर है, जो NSE की आय का एक बड़ा हिस्सा है। मैनेजमेंट के बयानों से संकेत मिलता है कि डेरिवेटिव्स वॉल्यूम में कमी आ सकती है, जो भविष्य की आय को प्रभावित कर सकता है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत ग्रोथ की ओर बढ़ रही है, RBI ने Q3 FY26 के लिए 7.4% GDP वृद्धि का अनुमान लगाया है। बाजार की भावना सकारात्मक बनी हुई है, और विश्लेषकों को उम्मीद है कि आर्थिक डेटा और मौद्रिक नीति के कारण इक्विटी के लिए अनुकूल माहौल बना रहेगा।
इसकी तुलना में, इसके प्रतिद्वंद्वी BSE लिमिटेड ने Q3 FY26 में ₹831.74 करोड़ का राजस्व और ₹219.67 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। फरवरी 2026 की शुरुआत में BSE का मार्केट कैप लगभग ₹1.18 लाख करोड़ था और इसका P/E अनुपात लगभग 65.6x था, जबकि NSE का अनलिस्टेड P/E FY25 के आंकड़ों के आधार पर लगभग 63.47x था।
लिस्टिंग की लंबी यात्रा
NSE के IPO का रास्ता लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा है, जिसकी शुरुआत 2016 में हुई थी। रेगुलेटरी जांच, जिसमें को-लोकेशन विवाद और गवर्नेंस के मुद्दे शामिल थे, के कारण देरी हुई। अक्टूबर 2024 में ₹643 करोड़ और हाल ही में ₹1,388 करोड़ के निपटान सहित रेगुलेटरी मामलों के निपटारे से SEBI की मंजूरी का मार्ग प्रशस्त हुआ। एक्सचेंज का लक्ष्य मार्च या अप्रैल 2026 की शुरुआत तक अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल करना है। FY26 के नौ महीनों के लिए, NSE का सरकार के खजाने में कुल योगदान ₹41,842 करोड़ रहा, जिसमें ₹34,835 करोड़ सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (securities transaction taxes) के रूप में शामिल थे।