National Stock Exchange (NSE) के लंबे समय से प्रतीक्षित IPO का रास्ता साफ होता दिख रहा है। SEBI अब कंपनी के ड्राफ्ट पेपरों की समीक्षा के अंतिम चरणों में है, जिसके बाद **₹30,000 करोड़** का यह आईपीओ बाजार में दस्तक दे सकता है।
बाजार में क्या है हलचल?
SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने स्पष्ट किया है कि एक्सचेंज के आईपीओ के लिए ड्राफ्ट पेपरों की समीक्षा अब अंतिम दौर में है। यह कदम वर्षों की कानूनी बाधाओं और नियामक चुनौतियों को पार करने के बाद उठाया गया है। यह आईपीओ पूरी तरह से 'Offer for Sale' (OFS) होगा, जिसमें मौजूदा शेयरधारक अपने 14.89 करोड़ शेयरों की बिक्री करेंगे। इस प्रक्रिया से होने वाली ₹30,000 करोड़ की राशि सीधे बिकवाली करने वाले शेयरधारकों के पास जाएगी, न कि कंपनी के पास।
लिस्टिंग के नियम और BSE पर दस्तक
भारतीय नियमों के अनुसार, कोई भी एक्सचेंज खुद को अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं कर सकता। इसी वजह से NSE ने BSE (Bombay Stock Exchange) पर लिस्ट होने की योजना बनाई है। हालांकि, भविष्य में NSE पर ही इन शेयरों को ट्रेड करने की अनुमति को लेकर चर्चा जारी है, जिसके लिए नियामक की विशेष मंजूरी अनिवार्य है।
पुरानी चुनौतियों का अंत
इस आईपीओ के पीछे का सफर आसान नहीं रहा है। को-लोकेशन फैसिलिटी और डार्क फाइबर नेटवर्क से जुड़े विवादों के कारण एक्सचेंज को कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। इन मामलों के निपटारे के बाद ही अब रास्ता साफ हो पाया है।
आगे क्या होगा?
बाजार के जानकारों के मुताबिक, इस आईपीओ का संभावित लॉन्च सितंबर 2026 के आसपास हो सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजरें SEBI के 'ऑब्जर्वेशन लेटर' पर टिकी हैं। आईपीओ की सफलता काफी हद तक उस समय की बाजार की स्थिति और उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगी।
