नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को सेबी (SEBI) से को-लोकेशन और डार्क फाइबर विवादों को ₹1,491.21 करोड़ में निपटाने की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इस सेटलमेंट से एक्सचेंज के लिस्टिंग प्लान में आ रही एक बड़ी रेगुलेटरी रुकावट दूर हो गई है। माना जा रहा है कि NSE सितंबर में ₹30,000 करोड़ के इश्यू साइज और ₹5 लाख करोड़ से अधिक के वैल्यूएशन के साथ IPO ला सकता है।
रेगुलेटरी मामला सुलझा, IPO की ओर बढ़ा NSE
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) ने आखिरकार सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के साथ को-लोकेशन और डार्क फाइबर से जुड़े पुराने विवादों का पटाक्षेप कर लिया है। 30 जुलाई, 2026 को एक्सचेंज ने पुष्टि की कि SEBI ने ₹1,491.21 करोड़ के सेटलमेंट को मंजूरी दे दी है। NSE के बोर्ड ने इस भुगतान को औपचारिक रूप से हरी झंडी दे दी है, जिसमें ₹714.74 करोड़ नकद दिए जाएंगे और ₹776.47 करोड़ का एडजस्टमेंट होगा जो पहले से ही रेगुलेटर के पास जमा थे।
IPO की टाइमलाइन पर असर
यह सेटलमेंट 2015 में शुरू हुए रेगुलेटरी विवाद का अंत है, जिसने लंबे समय से एक्सचेंज की पब्लिक लिस्टिंग की राह रोकी हुई थी। इस अनिश्चितता के खत्म होने से NSE के लिए इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) का रास्ता काफी हद तक साफ हो गया है। हालांकि एक्सचेंज ने अभी तक लॉन्च की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन बाजार की रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर में IPO लाने का लक्ष्य रखा जा रहा है। अगर यह सफल रहा, तो NSE अपने प्रतिस्पर्धी BSE की तरह स्टॉक मार्केट में लिस्टेड एंटिटी बन जाएगा।
IPO स्ट्रक्चर और शेयरहोल्डर एग्जिट
जून में फाइल किए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के अनुसार, प्रस्तावित IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में होगा। इसका मतलब है कि IPO से कोई नया शेयर जारी नहीं किया जाएगा और कंपनी को इससे कोई नई पूंजी नहीं मिलेगी। इसके बजाय, मौजूदा शेयरहोल्डर लगभग 6% इक्विटी बेचकर करीब 14.89 करोड़ शेयर डाइल्यूट करने की योजना बना रहे हैं।
इस शेयर बिक्री में बड़े वित्तीय संस्थान शामिल हैं। भारतीय स्टेट बैंक सबसे बड़ा सेलर होगा, जो 2.48 करोड़ शेयर तक बेचने का इरादा रखता है। कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) और MS स्ट्रेटेजिक (मॉरीशस) जैसे अन्य प्रमुख निवेशक भी इसमें भाग लेंगे। यह ध्यान देने योग्य है कि GIC Re और New India Assurance जैसे कई सरकारी बीमाकर्ता इस शेयर बिक्री में भाग ले रहे हैं, लेकिन भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने फिलहाल अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला नहीं किया है।
निवेशकों के लिए मायने और आगे की राह
निवेशकों के लिए इस खबर का सबसे अहम पहलू यह है कि NSE पर वर्षों से मंडरा रहा रेगुलेटरी संकट अब खत्म हो गया है। ₹5 लाख करोड़ से अधिक के अनुमानित वैल्यूएशन के साथ, NSE का IPO भारतीय बाजार के इतिहास के सबसे बड़े IPO में से एक होने की उम्मीद है।
जैसे-जैसे एक्सचेंज सितंबर में अपेक्षित लॉन्च की ओर बढ़ रहा है, बाजार के लिए मुख्य फोकस निवेशकों के रोडशो की प्रगति और बेचने वाले शेयरधारकों द्वारा तय की जाने वाली अंतिम कीमत पर रहेगा। निवेशकों को IPO की अंतिम तारीखों और फाइलिंग प्रक्रिया के दौरान शेयर बिक्री की संरचना में किसी भी संभावित समायोजन के संबंध में NSE से आने वाले अपडेट्स पर भी नजर रखनी चाहिए।
