सेबी की मंज़ूरी से खुला लिस्टिंग का रास्ता
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) ने एक बड़ा रेगुलेटरी पड़ाव पार कर लिया है। सेबी (SEBI) से इसे आईपीओ (IPO) के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (No-objection certificate) मिल गया है। यह मंज़ूरी करीब एक दशक से अटकी पड़ी लिस्टिंग प्रक्रिया में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुई है। NSE अब एक 'प्योर ऑफर फॉर सेल' (OFS) मॉडल के तहत लिस्ट होगा, जिसका मतलब है कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे, न कि कंपनी खुद नए फंड्स जुटाएगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक्सचेंज मार्च-अप्रैल तक अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल करने की योजना बना रहा है। NSE के अनलिस्टेड शेयर की कीमत फिलहाल लगभग $55 बिलियन (लगभग ₹4.5 लाख करोड़) के वैल्यूएशन पर है, और इस आईपीओ के ज़रिए लगभग ₹23,000 करोड़ जुटाए जाने की उम्मीद है। यह भारत के सबसे बड़े पब्लिक ऑफर में से एक होगा।
एक दशक की जद्दोजहद और रेगुलेटरी मुद्दे
NSE का पब्लिक मार्केट में आने का सफर आसान नहीं रहा है। 2016 में को-लोकेशन (co-location) और 'डार्क फाइबर' (dark fibre) ट्रेडिंग जैसी प्रथाओं को लेकर रेगुलेटरी जांचों ने इसकी लिस्टिंग को रोक दिया था। इन मुद्दों को सुलझाने के लिए NSE ने सेबी के साथ लगभग ₹1,400 करोड़ का सेटलमेंट किया था, जिसे इस लिस्टिंग के लिए एक ज़रूरी कदम माना जा रहा था। सेबी से मिली यह फाइनल क्लीयरेंस, बिना किसी औपचारिक कमेटी की मंज़ूरी का इंतज़ार किए, यह संकेत देती है कि एक्सचेंज ने अपनी पिछली गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं को दूर कर लिया है।
ऑपरेशनल चुनौती: 2 लाख के करीब शेयरधारक
NSE के आईपीओ के सामने सबसे बड़ी ऑपरेशनल चुनौती उसके विशाल शेयरधारक बेस को लेकर है। यह संख्या बढ़कर लगभग 1.91 लाख (1,91,000) निवेशकों तक पहुंच गई है। इतने बड़े और बिखरे हुए शेयरधारक बेस को OFS में भाग लेने के लिए सहमत करना एक जटिल और समय लेने वाला काम हो सकता है, जो कि सामान्य आईपीओ से काफी अलग है जहाँ मुख्य फोकस कैपिटल जुटाना होता है।
वित्तीय मोर्चे पर, NSE ने फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) में ₹19,177 करोड़ का रेवेन्यू और ₹12,188 करोड़ का नेट प्रॉफिट (मुनाफा) दर्ज किया। अनलिस्टेड मार्केट में इसके शेयर लगभग ₹2,110 पर ट्रेड कर रहे हैं, जिससे इसका पी/ई रेश्यो (P/E ratio) लगभग 63.47 और आर.ओ.ई. (ROE) 46% है।
बाज़ार में पकड़ और भविष्य की उम्मीदें
NSE भारत का प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज है और इक्विटी कैश, ऑप्शंस और फ्यूचर्स ट्रेडिंग सेगमेंट में इसका दबदबा कायम है। इसका मुख्य कॉम्पिटिटर, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹1.17 लाख करोड़ और TTM P/E रेश्यो फरवरी 2026 तक लगभग 68.5 है। हालांकि BSE लिस्टेड कंपनियों के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा एक्सचेंज है, लेकिन मार्केट कैप के लिहाज़ से NSE टॉप ग्लोबल एक्सचेंजों में गिना जाता है।
भारतीय कैपिटल मार्केट्स 2026 में मज़बूत आर्थिक गति और सरकारी नीतियों के सपोर्ट से ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। 2025 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के पैसे निकालने के बावजूद, उनके वापस आने की उम्मीद है, जो बाज़ार के प्रदर्शन और स्टॉक वैल्यूएशन को सपोर्ट कर सकता है। भारतीय IPO मार्केट ने मज़बूत घरेलू निवेशकों की मांग के चलते लचीलापन दिखाया है। एनालिस्ट्स NSE के भविष्य को लेकर उत्साहित हैं और आने वाले सालों में 15-23% की सी.ए.जी.आर. (CAGR) ग्रोथ का अनुमान लगा रहे हैं, जिससे यह भारत के बढ़ते कैपिटल मार्केट्स का एक बड़ा लाभार्थी साबित हो सकता है।