NSE IPO में बड़ी राहत: को-लोकेशन केस सेटलमेंट के लिए SC की मंजूरी ज़रूरी

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AuthorAditya Rao|Published at:
NSE IPO में बड़ी राहत: को-लोकेशन केस सेटलमेंट के लिए SC की मंजूरी ज़रूरी
Overview

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का IPO अब हकीकत के करीब है। SEBI ने को-लोकेशन और डार्क फाइबर विवादों के लिए ₹1,388 करोड़ के सेटलमेंट को हरी झंडी दे दी है, जो लगभग एक दशक से अटके मामले में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, लिस्टिंग अब सुप्रीम कोर्ट से इस सेटलमेंट के लिए मंजूरी मिलने पर निर्भर करती है, क्योंकि SEBI स्वयं इस मामले में एक पक्षकार (appellant) है।

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को को-लोकेशन और डार्क फाइबर से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवादों को ₹1,388 करोड़ में निपटाने के लिए सैद्धांतिक (in-principle) मंजूरी दे दी है। SEBI के सेटलमेंट नियमों के तहत उठाया गया यह कदम, NSE की एक दशक से अटकी हुई इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) योजनाओं को शुरू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।

हालांकि, आगे का रास्ता कानूनी रूप से जटिल है। चूंकि SEBI स्वयं सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) के एक पिछले आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक अपीलीय पक्ष (appellant) है, इसलिए नियामक इस मामले को एकतरफा बंद नहीं कर सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि SEBI को सुप्रीम कोर्ट से सेटलमेंट की शर्तों के अनुसार अपनी अपील को वापस लेने या निपटाने की अनुमति प्राप्त करने के लिए एक आवेदन दायर करना होगा। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि सेटलमेंट की जांच अदालत में हो, जिससे उसकी वैधता और सार्वजनिक हित के साथ सामंजस्य की पुष्टि हो सके।

एक बार जब सुप्रीम कोर्ट औपचारिक रूप से सेटलमेंट को दर्ज कर लेगा, तो NSE के IPO के लिए अंतिम नियामक बाधा दूर होने की उम्मीद है। इस न्यायिक स्वीकृति के बाद, NSE अपनी ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) को फिर से दाखिल कर सकेगा। इसके बाद एक्सचेंज SEBI की डिस्क्लोजर रिव्यू प्रक्रिया से गुजरेगा और संभवतः इन-प्रिंसिपल लिस्टिंग अप्रूवल मांगेगा, जो आमतौर पर BSE से मिलता है, जिसके बाद बुक-बिल्डिंग और अंतिम लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू होगी। कानूनी जानकारों का कहना है कि इस न्यायिक प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं।

भले ही SEBI के अध्यक्ष तुहिन कांता पांडे ने हाल ही में संकेत दिया था कि IPO के लिए 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) एक महीने के भीतर जारी किया जा सकता है, लेकिन कानूनी पेशेवरों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। जब तक सुप्रीम कोर्ट अपील का निपटारा नहीं कर देती, तब तक बिना शर्त NOC जारी होने की संभावना कम है। सेटलमेंट मार्ग को सबसे व्यावहारिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, जो न्यायिक मंजूरी मिलने पर प्रक्रियात्मक अंतिम रूप देगा और निवेशक विश्वास को बनाए रखेगा।

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