National Stock Exchange (NSE) ने हालिया ऑडिट में ब्रोकरेज फर्मों के कामकाज में बड़ी गड़बड़ियां पकड़ी हैं। Margin Trading Facility (MTF) का बुक साइज बढ़कर **₹1.48 लाख करोड़** के पार पहुंच गया है, जिससे जुड़े नियमों के उल्लंघन और साइबर सुरक्षा में कमी को लेकर एक्सचेंज ने चिंता जताई है।
मार्जिन ट्रेडिंग में नियमों की अनदेखी
NSE ने अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच किए गए ऑडिट में गंभीर खामियां उजागर की हैं। सबसे बड़ा मुद्दा Margin Trading Facility (MTF) से जुड़ा है, जिसका मार्केट साइज अगस्त 2025 के ₹96,000 करोड़ से उछलकर अगस्त 2026 तक ₹1.48 लाख करोड़ हो गया है। ऑडिट में पाया गया कि कुछ ब्रोकर नियमों को ताक पर रखकर अयोग्य सिक्योरिटीज को कोलैटरल के रूप में स्वीकार कर रहे थे। इतना ही नहीं, मार्जिन कलेक्शन में कमी और नुकसान की गलत रिपोर्टिंग ने सिस्टम के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है।
साइबर सुरक्षा और फ्रॉड का खतरा
ब्रोकरेज फर्मों के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी बड़े सवाल उठे हैं। कमजोर पासवर्ड पॉलिसी और अपर्याप्त टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) के कारण रिटेल निवेशकों का डेटा हैक होने के जोखिम में है। साथ ही, 'ऑथराइज्ड पर्सन्स' द्वारा बिना क्लाइंट की अनुमति के ट्रेड करना और फिक्स्ड रिटर्न का झांसा देना जैसे मामले भी सामने आए हैं, जो SEBI और NSE के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
- कॉन्ट्रैक्ट नोट्स चेक करें: हर ट्रेड का मिलान करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह आपकी मंजूरी से हुआ है।
- सिक्योरिटी बढ़ाएं: अपने ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य रूप से इनेबल रखें।
- सावधानी बरतें: कभी भी अपना लॉगिन क्रेडेंशियल ब्रोकर प्रतिनिधि के साथ साझा न करें।
- शिकायत करें: यदि कोई आपको फिक्स्ड रिटर्न का लालच दे रहा है, तो तुरंत एक्सचेंज या ब्रोकर के कंप्लायंस डिपार्टमेंट को सूचित करें।
