National Stock Exchange (NSE) अब खुद के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने की संभावना तलाश रहा है। इसके लिए NSE ने SEBI से मौजूदा नियमों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है ताकि भारतीय एक्सचेंज ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के बराबर आ सकें।
नियम बदलने की कवायद
National Stock Exchange (NSE) ने बाजार नियामक SEBI के सामने एक अहम प्रस्ताव रखा है। NSE के चेयरमैन श्रीनिवास इनजेती ने संकेत दिया है कि अब समय आ गया है कि भारत में स्टॉक एक्सचेंज की 'सेल्फ-लिस्टिंग' पर लगे प्रतिबंधों को फिर से परखा जाए। फिलहाल भारतीय कानून के तहत कोई भी एक्सचेंज अपने ही सिस्टम पर लिस्ट नहीं हो सकता, जिसके चलते NSE अभी Bombay Stock Exchange (BSE) पर लिस्टेड है।
क्यों है यह प्रतिबंध?
इस नियम के पीछे सबसे बड़ी चिंता 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' (Conflict of Interest) की है। नियामक का मानना है कि यदि कोई एक्सचेंज खुद को रेगुलेट करने के साथ-साथ खुद को लिस्ट करता है, तो पारदर्शिता और निगरानी पर सवाल उठ सकते हैं। हालांकि, दुनिया भर के विकसित बाजारों जैसे लंदन, न्यूयॉर्क और सिडनी में एक्सचेंज अपने ही प्लेटफॉर्म पर ट्रेड होते हैं।
ग्लोबल बेंचमार्क की ओर कदम
तकनीक और बेहतर रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के चलते दुनिया भर में यह मॉडल सफल साबित हुआ है। NSE का तर्क है कि भारत के मैच्योर होते कैपिटल मार्केट के लिए अब ग्लोबल प्रैक्टिस को अपनाना जरूरी है। हालांकि, SEBI का अंतिम फैसला ही यह तय करेगा कि क्या भारत के सबसे बड़े एक्सचेंज को अपने नियमों में बड़ी छूट मिलेगी या नहीं। फिलहाल मार्केट रेगुलेटर की ओर से कोई आधिकारिक बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन इस प्रस्ताव ने बाजार में नई चर्चा छेड़ दी है।
