NSE का नया दांव! आ रहा है नया वोलेटिलिटी इंडेक्स, डेरिवेटिव्स मार्केट में वापसी की तैयारी

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AuthorMehul Desai|Published at:
NSE का नया दांव! आ रहा है नया वोलेटिलिटी इंडेक्स, डेरिवेटिव्स मार्केट में वापसी की तैयारी

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) एक नया वोलेटिलिटी इंडेक्स (Volatility Index) तैयार कर रहा है। यह मौजूदा India Vix का विकल्प या उत्तराधिकारी बन सकता है। इस कदम का मकसद भविष्य में मार्केट में उतार-चढ़ाव से जुड़े डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स (Derivatives Contracts) लॉन्च करना है।

Detailed Coverage

NSE की नई पहल: India Vix से दूरी

NSE ने अपने मौजूदा India Vix बेंचमार्क पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। एक्सचेंज अब अपने खुद के वोलेटिलिटी इंडेक्स को विकसित करने पर काम कर रहा है। इसके लिए, NSE ने मार्केट के जोखिम और कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को मापने के लिए कई कैलकुलेशन मेथोडोलॉजी (Calculation Methodologies) की जांच शुरू कर दी है। यह पहल इस बात के गहन आंतरिक मूल्यांकन के बाद आई है कि मार्केट की वोलेटिलिटी को ट्रैक करने और डेटा प्रदान करने का सबसे अच्छा तरीका क्या हो सकता है।

पायलट टेस्टिंग और भविष्य की रणनीति

इस नए इंडेक्स की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए, NSE बड़े पैमाने पर पायलट टेस्टिंग (Pilot Testing) की योजना बना रहा है। एक्सचेंज यह देखेगा कि यह इंडेक्स मार्केट की हाई और लो एक्टिविटी के दौरान कैसा प्रदर्शन करता है और इसकी तुलना मौजूदा बेंचमार्क से करेगा। इस टेस्टिंग फेज में कई महीनों का समय लग सकता है, क्योंकि एक्सचेंज इंडेक्स के फॉर्मूले को बेहतर बनाने के लिए डेटा इकट्ठा करेगा। आंतरिक टेस्टिंग पूरी होने के बाद, NSE वित्तीय विशेषज्ञों और मार्केट पार्टिसिपेंट्स के साथ सलाह-मशविरा करेगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इंडेक्स इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करता है।

डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर असर

निवेशकों के लिए, इसका सबसे बड़ा संभावित परिणाम वोलेटिलिटी-लिंक्ड डेरिवेटिव्स का दोबारा आगाज हो सकता है। NSE ने 2014 में India Vix पर आधारित फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स (Futures Contracts) पेश किए थे, लेकिन 2017 में ट्रेडिंग वॉल्यूम (Trading Volume) और पार्टिसिपेंट इंटरेस्ट की कमी के कारण इन्हें बंद कर दिया गया था। एक नया, अधिक मजबूत इंडेक्स एक बेहतर डेरिवेटिव्स प्रोडक्ट लाइनअप के लिए आधार प्रदान कर सकता है। अगर एक्सचेंज ऐसे कॉन्ट्रैक्ट्स लॉन्च करने की ओर बढ़ता है, तो उसे भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से नई मंजूरी लेनी होगी।

क्यों जरूरी है नया इंडेक्स?

वर्तमान में, India Vix को निफ्टी इंडेक्स ऑप्शन्स (Nifty Index Options) की कीमतों का उपयोग करके कैलकुलेट किया जाता है। Vix नाम का ट्रेडमार्क अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, विशेष रूप से शिकागो बोर्ड ऑप्शन्स एक्सचेंज (CBOE) और स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (Standard & Poor’s) के पास है, जो भारत में ब्रांड का लाइसेंस देते हैं। अपना खुद का प्रोप्राइटरी इंडेक्स विकसित करके, NSE अपने वोलेटिलिटी-ट्रैकिंग टूल पर अधिक नियंत्रण हासिल करेगा और लाइसेंस प्राप्त बेंचमार्क पर निर्भरता कम करेगा। यह कदम एक्सचेंज की प्रोडक्ट ऑफरिंग का विस्तार करने और मार्केट लिक्विडिटी (Market Liquidity) को गहरा करने की व्यापक रणनीति के अनुरूप है।

रेगुलेटरी और एग्जीक्यूशन का संदर्भ

इस इंडेक्स का विकास ऐसे समय में हुआ है जब एक्सचेंज SEBI के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल करने जैसी अपनी पब्लिक मार्केट प्रक्रियाओं को भी निपटा रहा है। हालांकि एक्सचेंज ने लॉन्च के लिए कोई विशिष्ट समय-सीमा नहीं बताई है, किसी भी नए वोलेटिलिटी-लिंक्ड प्रोडक्ट की सफलता काफी हद तक मार्केट एडॉप्शन (Market Adoption) और लगातार लिक्विडिटी उत्पन्न करने की क्षमता पर निर्भर करेगी - जो कि पिछली Vix फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स की विफलता का मुख्य कारण थी। निवेशकों को नए इंडेक्स की मेथोडोलॉजी और नियामक अनुमोदन के लिए किसी भी बाद की फाइलिंग पर आगे के अपडेट्स पर नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.