National Stock Exchange पर अगस्त महीने में ट्रेडिंग वॉल्यूम **5 महीने** के निचले स्तर पर आ गया है। इसकी बड़ी वजह **3 अगस्त** से लागू हुआ नया 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) है, जिसके कारण मार्केट में अनपेक्षित वोलैटिलिटी देखी जा रही है।
बाजार की सुस्ती के आंकड़े
अगस्त 2026 में भारतीय शेयर बाजार में सुस्ती साफ दिखी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का एवरेज डेली टर्नओवर गिरकर ₹1,16,579 करोड़ पर आ गया, जो कि जुलाई के मुकाबले करीब 3% कम है। निवेशक और बड़े इंस्टीट्यूशनल प्लेयर्स इस नए क्लोजिंग सिस्टम के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या है नया सिस्टम?
SEBI ने 3 अगस्त से डेरिवेटिव सेगमेंट के शेयरों के लिए नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) लागू किया है। पहले क्लोजिंग प्राइस पिछले 30 मिनट के वेटेड एवरेज से तय होता था, लेकिन अब 3:15 PM से 3:35 PM तक 20 मिनट का एक कॉल ऑक्शन विंडो होता है। इसमें ऑर्डर्स मैच करके एक 'इक्विलिब्रियम प्राइस' निकाला जाता है।
अचानक आए बड़े झटके
इस नए बदलाव ने ट्रेडर्स की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 27 अगस्त को मंथली एक्सपायरी के दिन BSE Sensex में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा गया। इस दौरान इंडेक्स के इंडिकेटिव प्राइस में करीब 2,000 पॉइंट की गिरावट और फिर रिकवरी दर्ज की गई। इस अस्थिरता ने ऑप्शंस ट्रेडर्स के बीच काफी कंफ्यूजन पैदा कर दिया है।
SEBI का रुख
बाजार के विरोध के बावजूद SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल इस नियम को बदलने की कोई योजना नहीं है। रेगुलेटर का मानना है कि इस सिस्टम को सेटल होने में समय लगेगा और यह आगे चलकर प्राइस मैनिपुलेशन को कम करने में मदद करेगा।
फिलहाल निवेशकों के लिए सलाह यह है कि वे इन 20 मिनटों के दौरान सतर्क रहें, क्योंकि लिक्विडिटी कम होने के कारण बाजार में बड़े मूव्स देखने को मिल सकते हैं, जो आपके पोर्टफोलियो की क्लोजिंग वैल्यू को प्रभावित कर सकते हैं।
