NSE F&O: 6 नए शेयर डेरिवेटिव्स में शामिल, पर STT Hike और रिटेल निवेशकों के नुकसान का साया!

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AuthorAditya Rao|Published at:
NSE F&O: 6 नए शेयर डेरिवेटिव्स में शामिल, पर STT Hike और रिटेल निवेशकों के नुकसान का साया!
Overview

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) 1 अप्रैल, 2026 से अपने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में 6 नई कंपनियों को जोड़ने जा रहा है। यह कदम डेरिवेटिव्स पर प्रस्तावित STT (सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) में बढ़ोतरी और सेबी (SEBI) की रिटेल ट्रेडर्स को हो रहे भारी नुकसान की चेतावनी के बीच आया है।

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नई ऊंचाइयों की ओर NSE का F&O सेगमेंट: 6 स्टॉक्स की एंट्री!

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट को और मजबूत करने की तैयारी कर ली है। एक्सचेंज 1 अप्रैल, 2026 से 6 चुनिंदा कंपनियों को अपने डेरिवेटिव्स प्लेटफॉर्म पर शामिल करने जा रहा है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य मार्केट में लिक्विडिटी (liquidity) को बढ़ाना और ट्रेडर्स को ज्यादा से ज्यादा ट्रेडिंग ऑपर्च्युनिटीज (trading opportunities) मुहैया कराना है।

जिन स्टॉक्स को इस सेगमेंट में जोड़ा जाएगा, वे हैं: Adani Power, Cochin Shipyard, Hyundai Motor India, Motilal Osw Financial Services, Nippon Life India Asset Management, और Vishal Mega Mart।

इन स्टॉक्स का वैल्यूएशन क्या कहता है?

इन नई एंट्रीज़ का वैल्यूएशन (valuation) काफी दिलचस्प है।

  • Adani Power का P/E रेश्यो (Price-to-Earnings ratio) 23.71 से 24.54 के बीच है, और इसका मार्केट कैप (market cap) करीब ₹2.68 लाख करोड़ है।
  • Shipbuilder Cochin Shipyard का P/E 43.9 से 56.07 के दायरे में है, और मार्केट कैप लगभग ₹39,207 करोड़ है।
  • Hyundai Motor India का P/E करीब 29.32 से 32.1 के आसपास है, जबकि इसका मार्केट कैप ₹1.70 लाख करोड़ के पार है।
  • Motilal Osw Financial Services का P/E 11.7 से 21.26 के बीच दिख रहा है, और मार्केट कैप करीब ₹41,700 करोड़ है। ज्यादातर एनालिस्ट्स (analysts) इसे 'बाय' (Buy) रेटिंग दे रहे हैं।
  • Asset manager Nippon Life India का P/E लगभग 36.9 से 37.96 है, जिसका मार्केट कैप करीब ₹53,200 करोड़ है। कंपनी के फाइनेंशियल (financial) नतीजे मजबूत हैं और उस पर कोई कर्ज नहीं है।
  • Retail कंपनी Vishal Mega Mart का P/E रेश्यो काफी ऊंचा, 64.5 से 101.2 है, और मार्केट कैप करीब ₹50,700 करोड़ है। इसके बावजूद, एनालिस्ट्स को अभी भी 61.53% तक की ग्रोथ की संभावना दिख रही है, जो इसके हालिया ₹108.65 के भाव से काफी ऊपर है।

बड़े नियामक झटके: STT Hike और रिटेल निवेशकों का दर्द

हालांकि, NSE का यह विस्तार कई बड़े नियामक (regulatory) और आर्थिक झटकों के बीच हो रहा है। सरकार डेरिवेटिव्स पर लगने वाले STT (सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) में बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स (futures contracts) पर STT 0.02% से बढ़कर 0.05% हो सकता है, और ऑप्शन्स (options) के प्रीमियम (premium) पर 0.1% से 0.15%, जबकि एक्सरसाइज (exercise) पर 0.125% की दर लागू हो सकती है।

ये बदलाव 1 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे, जिससे सक्रिय ट्रेडर्स (active traders) के लिए ट्रेडिंग की लागत बढ़ जाएगी और बाजार की लिक्विडिटी (liquidity) कम हो सकती है। यह प्रस्ताव SEBI (सेबी) की हालिया चिंता के बिल्कुल उलट है, जिसमें कहा गया था कि पिछले फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) 2025 में 90% से अधिक रिटेल F&O ट्रेडर्स को नुकसान हुआ। इन ट्रेडर्स का कुल नुकसान 41% बढ़कर ₹1,05,603 करोड़ तक पहुंच गया था।

SEBI पहले ही मार्जिन (margin) की जरूरतें बढ़ाकर और कॉन्ट्रैक्ट साइज (contract size) को बड़ा करके सट्टेबाजी (speculation) पर अंकुश लगाने की कोशिश कर चुका है। ऐसे में, प्रस्तावित STT Hike रिटेल निवेशकों, खासकर नए या बार-बार ट्रेड करने वालों को हतोत्साहित कर सकता है। NSE ने STT Hike की समीक्षा (review) की मांग की है, क्योंकि यह हेजिंग (hedging) जैसे जरूरी कामों के लिए इस्तेमाल होने वाले फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर बुरा असर डाल सकता है। इन नई जोड़ी गई कंपनियों के लिए, यह माहौल रिटेल निवेशकों के लिए डेरिवेटिव ट्रेडिंग के जोखिम को और बढ़ा सकता है।

बाजार का आगे का नज़ारा

आने वाला फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) बाजार के लिए मिली-जुली तस्वीर पेश कर रहा है। एक तरफ एक्सचेंज (exchange) की तरफ से मार्केट का विस्तार हो रहा है, तो दूसरी ओर एक सख्त नियामक माहौल भी बन रहा है, जो उच्च लागतों और निवेशक सुरक्षा पर जोर दे रहा है।

व्यक्तिगत स्टॉक्स का प्रदर्शन उनकी कंपनी और सेक्टर के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा, लेकिन ब्रॉडर डेरिवेटिव्स मार्केट का भविष्य अनिश्चित लग रहा है। NSE के F&O सेगमेंट के विस्तार की सफलता, ऊंचे ट्रांजैक्शन टैक्स (transaction taxes) और रिटेल निवेशकों की लाभप्रदता (profitability) की लगातार चुनौती के सामने परखी जाएगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.