National Stock Exchange (NSE) ने अपनी 'Permitted-to-Trade' लिस्ट का विस्तार करते हुए इस साल 250 नए स्टॉक्स शामिल किए हैं। इस कदम से इन शेयरों का डेली टर्नओवर बढ़कर **₹400 करोड़** तक पहुंच गया है, जबकि एक्सचेंज अब **25 सितंबर, 2026** को आने वाले अपने IPO की तैयारी में जुटा है।
ट्रेडिंग दायरे का विस्तार
NSE के इस कदम से निवेशकों को अब उन शेयरों में भी ट्रेड करने की सुविधा मिल गई है जो मुख्य रूप से अन्य एक्सचेंजों जैसे Bombay Stock Exchange (BSE) पर लिस्टेड हैं। इस विस्तार का असर सीधा मार्केट लिक्विडिटी पर दिखा है, जहां इन एसेट्स का औसत डेली टर्नओवर ₹92 करोड़ से उछलकर ₹400 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है।
IPO और सेल्फ-ट्रेडिंग का विवाद
यह विस्तार ऐसे समय में हुआ है जब NSE अपने IPO की ओर कदम बढ़ा रहा है। मार्केट में चर्चा है कि क्या लिस्टिंग के बाद NSE अपने ही शेयरों को इस 'Permitted-to-Trade' फ्रेमवर्क के जरिए अपने प्लेटफॉर्म पर ट्रेड करने की अनुमति देगा। हालांकि, Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने इसे लेकर सवाल खड़े किए हैं। चूंकि एक्सचेंज खुद कंपनियों का रेगुलेटर होता है, इसलिए 'सेल्फ-ट्रेडिंग' पर हितों के टकराव (Conflict of Interest) का बड़ा जोखिम बना हुआ है।
रिस्क फैक्टर और सर्विलांस
निवेशकों के लिए एक चेतावनी भी है—इन 250 नए स्टॉक्स में से एक बड़ा हिस्सा एक्सचेंज के डायरेक्ट-लिस्टिंग मानकों पर खरा नहीं उतरता है। इनमें से 127 स्टॉक्स को रिस्क को देखते हुए Additional Surveillance Measure (ASM) या Graded Surveillance Measure (GSM) फ्रेमवर्क के तहत रखा गया है। साफ है कि लिक्विडिटी बढ़ाने की कोशिश के साथ-साथ बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी रोकने के लिए NSE कड़ी निगरानी भी बरत रहा है।
