NSDL के आंकड़ों के अनुसार, देश में डीमैट खातों की संख्या 2020 के **5 करोड़** से बढ़कर 2026 तक **23 करोड़** के स्तर को छू गई है। यह उछाल भारतीय रिटेल निवेशकों के बढ़ते भरोसे और बाजार की बढ़ती पहुंच का एक बड़ा प्रमाण है।
बाजार में आई निवेश क्रांति
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) की रिपोर्ट बताती है कि पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में शेयर रखने की सुविधा ने फिजिकल शेयर सर्टिफिकेट्स से होने वाले जोखिमों को पूरी तरह खत्म कर दिया है, जिससे मार्केट में लिक्विडिटी और पारदर्शिता काफी बढ़ गई है।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
NSDL अब देश के 99.9% पिन कोड्स तक अपनी सेवाएं पहुंचा चुका है, जिसके लिए 57,000 सर्विस सेंटर्स का एक मजबूत नेटवर्क काम कर रहा है। डिपॉजिटरी के पास ₹550 लाख करोड़ की एसेट अंडर कस्टडी है और यह 1,20,000 इश्यूअर्स को सपोर्ट कर रही है। भारत में डिपॉजिटरी स्पेस में NSDL और CDSL का दबदबा है, जो NSE और BSE के सुचारू संचालन के लिए रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं।
भविष्य की राह: DMAT 2.0 और रेगुलेशन
अब डिपॉजिटरी 'DMAT 2.0' की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिसमें सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के जरिए कॉर्पोरेट बॉन्ड टोकनाइजेशन को शामिल किया जाएगा। SEBI और RBI की देखरेख में चल रहे ये प्रोजेक्ट्स सेटलमेंट प्रोसेस को और अधिक आधुनिक बनाएंगे।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
इतने बड़े पैमाने पर डिजिटल डेटा हैंडल करने के कारण साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) सबसे अहम मॉनिटरेबल फैक्टर बन गया है। निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि जैसे-जैसे हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग और नए फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स का दायरा बढ़ेगा, सिस्टम की मजबूती ही बाजार का भरोसा कायम रखेगी।
