National Payments Corporation of India (NPCI) ने अपने महत्वाकांक्षी Unified Agentic Protocol (UAP) के लॉन्च को फिलहाल टाल दिया है। इस सिस्टम का मकसद UPI ट्रांजेक्शन में AI एजेंट्स को शामिल करना था, लेकिन सुरक्षा और जवाबदेही की समीक्षा के लिए इसे अभी होल्ड पर रखा गया है।
सुरक्षा बनी प्राथमिकता
NPCI के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह सिस्टम की सुरक्षा है। अब तक UPI ट्रांजेक्शन पूरी तरह से यूजर की मैन्युअल ऑथेंटिकेशन पर आधारित रहे हैं। लेकिन जैसे ही एआई एजेंट्स (AI Agents) को पेमेंट करने की शक्ति दी जाएगी, तो तकनीकी गड़बड़ी या फ्रॉड की स्थिति में जवाबदेही (Liability) किसकी होगी? NPCI इसी चुनौती को सुलझाने के लिए रेगुलेटर्स के साथ मिलकर एक मजबूत 'Know-Your-Agent' फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है।
क्यों जरूरी है ये बदलाव?
बिना सख्त गाइडलाइंस के एआई-आधारित पेमेंट सिस्टम लॉन्च करने से लाखों भारतीयों का डिजिटल पैसा रिस्क में आ सकता था। NPCI का मानना है कि ट्रांजेक्शन की स्टेबिलिटी से समझौता करना महंगा पड़ सकता है। फिलहाल संस्था इस बात पर काम कर रही है कि कैसे इन एजेंट्स को यूजर की तय सीमाओं के अंदर ही काम करने के लिए मजबूर किया जाए।
प्राइवेट प्लेयर्स और मार्केट का हाल
भले ही सरकारी स्तर पर इसे रोका गया है, लेकिन प्राइवेट कंपनियां चुप नहीं बैठी हैं। Pine Labs पहले ही अपना P3P प्रोटोकॉल लेकर आ चुका है, जबकि Visa और Mastercard जैसे ग्लोबल खिलाड़ी भी अपने 'Trusted Agent Protocol' पर काम कर रहे हैं। हालांकि, अंत में देखना यह होगा कि क्या ये प्राइवेट फ्रेमवर्क्स NPCI के आने वाले नेशनल स्टैंडर्ड्स के साथ तालमेल बिठा पाएंगे या उन्हें पूरी तरह बदलना होगा। आने वाले समय में Reserve Bank of India और NPCI की गाइडलाइंस ही फिनटेक सेक्टर के लिए 'नया नियम' तय करेंगी।
