NSE IPO के ग्रे मार्केट प्रीमियम में आई गिरावट का सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ा है जो इसमें हिस्सेदारी रखती हैं। 8 सितंबर, 2026 को New India Assurance Company (NIACL) और IFCI के शेयरों में **12%** तक की बड़ी गिरावट देखी गई है।
मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को बाजार में तब हड़कंप मच गया जब NSE से जुड़ी प्रॉक्सी कंपनियों यानी NIACL और IFCI के शेयरों में 12% तक का इंट्राडे करेक्शन देखा गया। यह गिरावट तब आई है जब NSE के बहुप्रतीक्षित IPO के लिए ग्रे मार्केट के उत्साह में कमी आई है।
क्यों गिरे ये शेयर?
NSE के शेयरों का ग्रे मार्केट प्रीमियम जो हाल ही में ₹285 के शिखर पर था, वह अब गिरकर लगभग ₹223 पर आ गया है। ग्रे मार्केट भले ही अनौपचारिक हो, लेकिन इसके संकेत निवेशकों की लिस्टिंग-डे की उम्मीदों को प्रभावित करते हैं, जिससे निवेशकों ने इन स्टॉक्स में प्रॉफिट-बुकिंग शुरू कर दी है।
प्रॉक्सी निवेश का कनेक्शन
निवेशक NIACL और IFCI को NSE का 'बैकडोर' एंट्री मानते हैं क्योंकि ये कंपनियां सीधे NSE में हिस्सेदारी रखती हैं। NIACL के पास NSE में 1.42% की डायरेक्ट हिस्सेदारी है, वहीं IFCI, Stock Holding Corporation of India (SHCIL) के जरिए NSE में 4.4% की अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी रखती है। 4 सितंबर, 2026 को SEBI द्वारा IPO के लिए अंतिम ऑब्जर्वेशन जारी करने के बाद से इन शेयरों में हलचल बढ़ गई थी।
जोखिम और चुनौतियां
निवेशकों को यह समझना होगा कि ये कंपनियां प्योर-प्ले एक्सचेंज स्टॉक्स नहीं हैं। NSE का बिजनेस मॉडल काफी हद तक 'ऑप्शंस ट्रेडिंग' पर निर्भर है, इसलिए F&O सेगमेंट में किसी भी रेगुलेटरी बदलाव का असर इसकी वैल्यूएशन पर पड़ सकता है। इसके अलावा, IFCI के सामने पहले से ही 'नेगेटिव CRAR' जैसी वित्तीय चुनौतियां हैं। जब तक IPO के लिए प्राइस बैंड और फाइनल टाइमलाइन घोषित नहीं होती, तब तक इन प्रॉक्सी स्टॉक्स में भारी उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं।
