नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) ने अब AI और क्लाउड सुरक्षा जैसे डिजिटल खतरों से निपटने के लिए एक **9 सदस्यीय** नई कमेटी का गठन किया है। यह कदम कंपनियों की फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी बढ़ाने और पारंपरिक ऑडिटिंग को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए उठाया गया है।
भारत में कॉर्पोरेट जगत की निगरानी को और सख्त और आधुनिक बनाने के लिए NFRA ने 'एडवाइजरी कमेटी ऑन ऑडिट क्वालिटी, एश्योरेंस एंड टेक्नोलॉजी' की शुरुआत की है। अब ऑडिटिंग सिर्फ मैन्युअल चेकिंग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड-बेस्ड डेटा और ऑटोमेटेड पेमेंट सिस्टम जैसे आधुनिक पहलुओं को परखा जाएगा।
निवेशकों के लिए यह क्यों है जरूरी?
आजकल कंपनियां अपने फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स के लिए ERP सॉफ्टवेयर और क्लाउड का सहारा ले रही हैं, जिससे डेटा लीक या छेड़छाड़ का खतरा बढ़ गया है। NFRA की यह पहल यह सुनिश्चित करेगी कि कंपनियों की फाइनेंशियल रिपोर्ट सिर्फ कागजों पर ही नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से भी सुरक्षित और सटीक हों।
कौन शामिल है इस कमेटी में?
इस पैनल में रेगुलेटरी और कॉर्पोरेट दिग्गजों का मिश्रण है। इसमें RBI की पूर्व डिप्टी गवर्नर श्यामला गोपीनाथ और SEBI के पूर्व सदस्य अनंत नारायण जैसे अनुभवी नाम शामिल हैं। इसके अलावा Hindalco और Sify Technologies जैसे बड़े घरानों के कॉर्पोरेट फाइनेंस लीडर्स को भी जगह दी गई है।
कंपनियों पर क्या पड़ेगा असर?
आने वाले समय में लिस्टेड कंपनियों के लिए IT कंट्रोल्स को लेकर सख्ती बढ़ सकती है। ऑडिटर्स अब कंपनियों से अधिक विस्तृत लॉग्स और सिस्टम सुरक्षा के दस्तावेजों की मांग कर सकते हैं। निवेशकों को NFRA की भविष्य की गाइडलाइंस पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इससे कंपनियों के IT इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड करने पर खर्च बढ़ सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह मार्केट में पारदर्शिता बढ़ाएगा।
