NFRA Chief: $30 ट्रिलियन की इकोनॉमी का सपना, ऑडिटिंग में पारदर्शिता है सबसे जरूरी

SEBIEXCHANGE
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
NFRA Chief: $30 ट्रिलियन की इकोनॉमी का सपना, ऑडिटिंग में पारदर्शिता है सबसे जरूरी

NFRA के चेयरपर्सन नितिन गुप्ता ने 2047 तक भारत की **$30 ट्रिलियन** की इकोनॉमी बनने के लक्ष्य को पारदर्शी फाइनेंशियल ऑडिट से जोड़ दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि गलत रिपोर्टिंग निवेशकों और कर्जदाताओं के लिए बड़ा जोखिम है।

मुंबई में आयोजित BFSI समिट में बोलते हुए NFRA के चेयरपर्सन नितिन गुप्ता ने साफ किया कि भारत की $30 ट्रिलियन की इकोनॉमी बनने की राह में सटीक फाइनेंशियल ऑडिट सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उनके अनुसार, फाइनेंशियल स्टेटमेंट सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि देश में पूंजी के प्रवाह का आधार हैं।

क्यों है पारदर्शिता जरूरी?

निवेशकों और लेंडर्स के लिए भरोसेमंद डेटा ही सब कुछ है। यदि फाइनेंशियल रिपोर्ट कंपनी की स्थिति को सही ढंग से नहीं दिखाती, तो अनिश्चितता बढ़ती है, जिससे कर्ज लेना महंगा हो जाता है। Crisil Ltd के आंकड़ों के मुताबिक, भारत को 2027 से 2031 के बीच ₹145 ट्रिलियन से ₹155 ट्रिलियन तक के कैपिटल एक्सपेंडिचर की जरूरत होगी। ऐसे में شفاف (Transparent) रिपोर्टिंग और भी अनिवार्य हो गई है।

रिस्क और एक्शन प्लान

NFRA ने चेतावनी दी है कि फाइनेंशियल सेक्टर में कमजोर रिपोर्टिंग से 'सिस्टमिक शॉक' आ सकता है, जिसका असर शेयरधारकों से लेकर डिपॉजिटर्स तक हर किसी पर पड़ता है। नियामक अब 'रिलेटेड-पार्टी ट्रांजेक्शन' (Related-party transactions) पर खास नजर रख रहा है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बड़े फंडिंग फैसले सही व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए लिए गए हैं।

ऑडिट कमिटी के लिए निर्देश

अब वक्त आ गया है कि ऑडिट कमिटी सिर्फ खानापूर्ति न करे। NFRA का मानना है कि पब्लिक इंस्पेक्शन रिपोर्ट्स को एक डायग्नोस्टिक टूल की तरह इस्तेमाल किया जाना चाहिए। कमिटी को ऑडिटर्स से क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम और कमजोरियों पर सवाल पूछने चाहिए। निवेशकों के लिए इसका मतलब साफ है—आने वाले समय में कंपनियों की फाइनेंशियल सेहत की जांच-पड़ताल और सख्त होने वाली है, खासकर उन सेक्टरों में जहां जनता का पैसा दांव पर लगा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.