National Financial Reporting Authority (NFRA) ने साफ कर दिया है कि AI के इस्तेमाल के बावजूद ऑडिटर्स अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। अब ऑडिट रिपोर्ट में किसी भी गड़बड़ी के लिए सीधा जवाबदेह संबंधित ऑडिटर ही होगा।
ऑडिटिंग के क्षेत्र में बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर NFRA ने सख्ती बरतना शुरू कर दिया है। रेगुलेटर जल्द ही 'स्टाफ सीरीज ऑन टेक्नोलॉजी इन ऑडिट' की दूसरी गाइडलाइन जारी करने वाला है, जिसका मुख्य संदेश यह है कि तकनीक का मतलब जिम्मेदारी से मुक्ति नहीं है। चाहे ऑडिट में कितना भी एडवांस सॉफ्टवेयर क्यों न इस्तेमाल किया जाए, अंत में जो ऑडिटर साइन करेगा, वही रिपोर्ट की सटीकता के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होगा।
टेक्नोलॉजी पर बढ़ती निर्भरता का जोखिम
रेगुलेटर का मानना है कि ऑडिट फर्म्स अब ऑटोमेटेड सिस्टम्स पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो रही हैं। इससे 'ऑटोमेशन बायस' (Automation Bias) का खतरा पैदा हो रहा है, जहां ऑडिटर बिना सोचे-समझे कंप्यूटर के आउटपुट पर भरोसा कर लेते हैं। इसके अलावा, AI मॉडल्स की पारदर्शिता और डेटा प्राइवेसी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नई कमेटी की निगरानी
इन जोखिमों को कम करने के लिए, NFRA ने 4 सितंबर, 2026 को 9 सदस्यों वाली एक 'एडवाइजरी कमेटी ऑन ऑडिट क्वालिटी, एश्योरेंस एंड टेक्नोलॉजी' का गठन किया है। यह कमेटी ऑडिटिंग में AI और साइबर सिक्योरिटी के सुरक्षित तालमेल पर नजर रखेगी।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
निवेशकों के लिए वित्तीय नतीजों की विश्वसनीयता ही बाजार का आधार है। यदि ऑडिट फर्म्स सॉफ्टवेयर की गलती का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़तीं, तो इससे कॉर्पोरेट गवर्नेंस में बड़ा लूपहोल पैदा हो सकता था। NFRA का यह रुख सुनिश्चित करता है कि तकनीक केवल एक सहायक उपकरण है, जबकि अंतिम जिम्मेदारी पूरी तरह मानवीय है।
