NCLT ने Subhash Chandra के पर्सनल इनसॉल्वेंसी केस की दोबारा सुनवाई के लिए **5** सदस्यों की विशेष बेंच बनाई है। इसके साथ ही **₹6.25 करोड़** के विवादित रिपेमेंट प्लान पर रोक लगा दी गई है, जबकि बैंकों के कुल दावे **₹22,000 करोड़** से भी अधिक हैं।
बेंच के गठन और स्टे का प्रभाव
NCLT ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 5 सदस्यों की एक स्पेशल बेंच का गठन किया है जो Subhash Chandra से जुड़े पर्सनल इनसॉल्वेंसी मामले की दोबारा जांच करेगी। इस आदेश के साथ ही 25 अगस्त, 2026 के उस फैसले पर भी रोक लग गई है, जिसने ₹6.25 करोड़ के मामूली कर्ज भुगतान प्लान को मंजूरी दी थी।
बैंकों के लिए बड़ा झटका
यह केस इसलिए चर्चा में है क्योंकि कर्जदाताओं द्वारा किए गए दावों और भुगतान के प्रस्ताव के बीच बहुत बड़ा अंतर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, RBL Bank, Canara Bank और Union Bank जैसे बड़े कर्जदाताओं ने कुल ₹22,006.57 करोड़ के दावे पेश किए हैं। इसके मुकाबले ₹6.25 करोड़ का भुगतान ऑफर करना बैंकों के लिए न के बराबर रिकवरी जैसा है, जिसके चलते यह कानूनी पेंच फंसा है।
एसेट बेचने पर रोक
ट्रिब्यूनल ने अंतरिम आदेश में Subhash Chandra पर अपनी प्रॉपर्टी बेचने, ट्रांसफर करने या उसे गिरवी रखने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। वहीं, Subhash Chandra ने इस बेंच के गठन को NCLAT में चुनौती दी है, उनका तर्क है कि NCLT के पास इस मामले के लिए ऐसी विशेष बेंच बनाने का कानूनी अधिकार नहीं है।
एसेट वैल्यूएशन पर सवाल
इस मामले ने फाइनेंशियल डिस्क्लोजर की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। एक तरफ जहां पुराने एसेट वैल्यूएशन अरबों में थे, वहीं इनसॉल्वेंसी प्रोसेस के दौरान नेट वर्थ केवल ₹31.79 करोड़ बताई गई है। इस भारी अंतर की जांच अब ट्रिब्यूनल बारीकी से कर रहा है।
आगे की राह
यह मामला Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) के लिए एक बड़ा मिसाल बन सकता है। अगली महत्वपूर्ण तारीख 23 सितंबर, 2026 है जब NCLT इस पर सुनवाई करेगा, जबकि 7 अक्टूबर, 2026 को NCLAT में इस विशेष बेंच के गठन पर बहस होगी।
