1 अप्रैल 2026 से लागू हुए SEBI के नए नियमों के बाद म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स अब अपने कई AMFI रजिस्ट्रेशन नंबर्स (ARN) को एक साथ मिला रहे हैं। इस कदम का मकसद उस टैक्स लूपहोल को खत्म करना है, जिसका इस्तेमाल GST से बचने के लिए किया जाता था।
म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स अब बड़े स्तर पर अपने AMFI Registration Numbers (ARN) को कंसोलिडेट यानी एक कर रहे हैं। 1 अप्रैल 2026 से लागू SEBI के नए रेगुलेटरी बदलावों के बाद डिस्ट्रीब्यूटर्स के काम करने के तरीके में यह बड़ा बदलाव आया है। इसकी मुख्य वजह GST को टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) से अलग करना है, जिससे कमीशन का कैलकुलेशन पूरी तरह बदल गया है।
टैक्स बचाने के 'जुगाड़' का हुआ अंत
पहले कई डिस्ट्रीब्यूटर्स एक से ज्यादा रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल करते थे ताकि उनकी सालाना कमाई ₹20 लाख की टर्नओवर लिमिट से नीचे रहे। इससे वे 18% की GST लायबिलिटी से बच जाते थे। यह टैक्स आर्बिट्रेज का एक तरीका था। लेकिन अब SEBI ने स्पष्ट कर दिया है कि AMCs केवल GST-एक्सक्लूसिव आधार पर कमीशन का भुगतान करेंगी। अब अगर आप GST-रजिस्टर्ड हैं, तभी GST क्लेम कर पाएंगे, अन्यथा केवल बेसिक कमीशन ही मिलेगा। इस बदलाव ने टैक्स बचाने के लिए अलग-अलग अकाउंट्स रखने का वित्तीय लाभ खत्म कर दिया है।
प्रशासनिक बोझ और बढ़ता अनुशासन
कई लाइसेंस मैनेज करना डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए एक बड़ा प्रशासनिक और कंप्लायंस बोझ बन गया था। अब जबकि टैक्स का फायदा नहीं रहा, तो डिस्ट्रीब्यूटर्स अपने ऑपरेशंस को सिंगल एंटिटी में मर्ज कर रहे हैं ताकि कागजी कार्रवाई कम हो और लागत पर लगाम लग सके। इसके लिए उन्हें एसेट मैनेजमेंट कंपनियों और AMFI-ARN कमेटी से क्लीयरेंस लेनी पड़ रही है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
यह बदलाव म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूशन के क्षेत्र में प्रोफेशनलिज्म लाएगा, लेकिन छोटे डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए मार्जिन का दबाव बढ़ सकता है। नवंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, निवेशक अब भी डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट प्लान्स की तरफ अधिक आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए अपनी वैल्यू साबित करना एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि अब उन्हें केवल ट्रांजेक्शन के बजाय 'एडवाइजरी' पर ज्यादा जोर देना होगा।
