भारतीय शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली से घबराहट है। रिटेल निवेशकों के ऊंचे कर्ज और मार्जिन ट्रेडिंग के चलते बाजार में बड़ी गिरावट के आसार हैं। Nifty 50 अब अहम सपोर्ट लेवल पर टिका है।
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल एक डिफेंसिव फेज से गुजर रहा है। बिकवाली का आलम यह है कि इंडेक्स के तमाम सेक्टर लाल निशान में हैं और कई शेयर लोअर सर्किट पर अटक गए हैं। बाजार में संस्थागत निवेशकों की सुस्ती ने माहौल को और खराब कर दिया है।
क्यों गहरा रहा है संकट?
बाजार में इस भारी उतार-चढ़ाव की सबसे बड़ी वजह रिटेल निवेशकों का कर्ज (Leverage) है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी के जरिए लिया गया कर्ज ₹1.46 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। इसे 'लिक्विडेशन साइकिल' कहा जाता है, जहां शेयर गिरने पर मार्जिन कॉल ट्रिगर होते हैं, और ट्रेडर्स को अपनी होल्डिंग्स बेचनी पड़ती है। यह बिकवाली बाजार को और नीचे धकेल रही है।
टेक्निकल लेवल्स पर नजर
तकनीकी मोर्चे पर, Nifty 50 के लिए 22,200 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण है। अगर इंडेक्स इससे नीचे फिसलता है, तो गिरावट और गहरी हो सकती है। वहीं, ऊपर की तरफ 23,600 (25-week moving average) पर एक बड़ी रेजिस्टेंस दीवार खड़ी है। फिलहाल बाजार का मूड देखकर इस लेवल को पार करना मुश्किल लग रहा है।
बैंकिंग सेक्टर में भी हलचल
Bank Nifty का प्रदर्शन भी चिंता का सबब बना हुआ है। बैंकिंग शेयरों का इंडेक्स में काफी वेटेज है, इसलिए यहां आ रही गिरावट पूरे मार्केट को नीचे खींच रही है। अब सभी की निगाहें मंथली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी से पहले के घटनाक्रमों पर टिकी हैं कि क्या बाजार यहां से संभलेगा या बिकवाली और तेज होगी।
