भारत में पैसिव इन्वेस्टमेंट का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है और म्यूचुअल फंड एसेट ₹85.76 लाख करोड़ के पार पहुंच गए हैं। अब मार्केट एक्सपर्ट्स 'स्टेट-स्पेसिफिक इंडेक्स' की चर्चा कर रहे हैं, हालांकि अभी तक किसी एक्सचेंज ने इसे लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
भारत में पैसिव इन्वेस्टमेंट का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। जुलाई 2026 तक म्यूचुअल फंड्स का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹85.76 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है, जिसमें से पैसिव फंड्स (जैसे ETFs और इंडेक्स फंड्स) का हिस्सा ₹15.15 लाख करोड़ हो चुका है। यह स्पष्ट करता है कि निवेशक अब कम लागत वाले और सरल इंडेक्स-बेस्ड निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।
क्या राज्यों के आधार पर आएंगे इंडेक्स?
इसी बढ़ते ट्रेंड के बीच, मार्केट एक्सपर्ट्स अब 'स्टेट-स्पेसिफिक इंडेक्स' (State-Specific Indices) की वकालत कर रहे हैं। इस विचार का उद्देश्य महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे औद्योगिक हब के विकास को ट्रैक करना है। यह ग्लोबल मार्केट में मौजूद रीजनल इंडेक्स जैसा होगा, जो निवेशकों को किसी विशेष राज्य की आर्थिक नीतियों और वहां के औद्योगिक विकास पर दांव लगाने का मौका देगा।
एक्सचेंज और SEBI का रुख
निवेशकों को यह समझना होगा कि फिलहाल यह सिर्फ मार्केट में चर्चा का विषय है। सितंबर 2026 तक, न तो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और न ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने ऐसे किसी इंडेक्स को लॉन्च करने की पुष्टि की है। एक्सचेंज अभी सेक्टर और थीम आधारित इंडेक्स पर फोकस कर रहे हैं, जैसा कि NSE ने हाल ही में 11 नए सेक्टर इंडेक्स लॉन्च किए हैं।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
अगर भविष्य में ऐसे इंडेक्स आते भी हैं, तो इसमें कई रिस्क हो सकते हैं:
- कंसंट्रेशन रिस्क: किसी एक राज्य पर केंद्रित होने के कारण, उस राज्य की नीतियों या आपदाओं का सीधा असर इंडेक्स पर पड़ेगा।
- लिक्विडिटी (Liquidity): ऐसे इंडेक्स में शामिल छोटी कंपनियां अक्सर कम ट्रेड होती हैं, जिससे एग्जिट करना मुश्किल हो सकता है।
- रेगुलेटरी नजरिया: SEBI इस समय पैसिव फंड्स के बढ़ते विस्तार को लेकर सतर्क है और किसी भी नए प्रकार के बेंचमार्क को कड़े नियमों के दायरे में रखा जाएगा।
फिलहाल, निवेशकों को मार्केट की अफवाहों के बजाय SEBI के सर्कुलर और आधिकारिक एक्सचेंज फाइल्स पर नजर रखनी चाहिए।
