महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने सरोगेट टोबैको विज्ञापनों के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। इसके साथ ही, फार्मा और मिल्क सप्लाई चेन में सुरक्षा मानकों को लेकर भी जांच तेज कर दी गई है, जिससे कंपनियों के लिए अनुपालन (compliance) का दबाव बढ़ गया है।
महाराष्ट्र की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने अपनी आक्रामक रेगुलेटरी नीति को और कड़ा कर दिया है। कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने स्पष्ट किया है कि बॉलीवुड सितारों द्वारा किए जा रहे सरोगेट विज्ञापनों (surrogate advertising) के खिलाफ जांच जारी रहेगी। FDA ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ जैसे बड़े सितारों को नोटिस जारी किए हैं। आरोप है कि 'इलायची' के नाम पर प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाला का प्रचार किया जा रहा है, जो 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006' का उल्लंघन है।
निवेशकों के लिए संकेत
इस कदम से साफ है कि अब रेगुलेटर्स 'ब्रांड एक्सटेंशन' पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। जो कंपनियां टोबैको बैन से बचने के लिए इस तरह के विज्ञापन का सहारा लेती हैं, उन्हें अब भविष्य में कानूनी अड़चनों और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। इससे कंज्यूमर गुड्स कंपनियों के मार्केटिंग बजट और एड कैंपेन पर असर पड़ सकता है।
फार्मा और मिल्क सेक्टर पर फोकस
FDA का दायरा विज्ञापनों से आगे बढ़कर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तक फैल चुका है। जून से अगस्त 2026 के बीच ₹11.41 करोड़ की दवाएं जब्त की गई हैं। फार्मा कंपनियों में खराब स्टोरेज और अस्वच्छ मशीनों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने और आपराधिक शिकायतें दर्ज करने जैसी सख्त कार्रवाई की जा रही है।
इसके अलावा, दूध में मिलावट रोकने के लिए सरकार 'इयर-टैग आइडेंटिफिकेशन' (ear-tag identification) जैसी डिजिटल मॉनिटरिंग लाने की तैयारी में है। इस पूरी कवायद का सीधा मतलब है कि अब कंपनियों, विशेषकर छोटे प्लेयर्स के लिए ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ सकती है और ऑडिट का स्तर काफी कड़ा हो जाएगा। जिन कंपनियों के पास मजबूत कंप्लायंस फ्रेमवर्क है, वे इस दौर में सुरक्षित रहेंगी, जबकि कमजोर इंटरनल कंट्रोल वाली कंपनियों के लिए सप्लाई चेन में बाधाएं आ सकती हैं।
