ग्लोबल इंडेक्स प्रोवाइडर MSCI ने दुनिया भर के स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टेड कंपनियों के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है। भारत के NSE और BSE समेत प्रमुख एक्सचेंजों पर 'इनएलिजिबल अलर्ट बोर्ड' वाले स्टॉक्स की निगरानी की अवधि को MSCI अब कम कर रहा है। यह बदलाव चालू इंडेक्स रिव्यू साइकिल से ही लागू होगा।
MSCI के नियमों में बड़ा बदलाव
MSCI Inc. ने अपने ग्लोबल इन्वेस्टेबल मार्केट इंडेक्स (GIMI) में स्टॉक्स के शामिल होने के मानदंडों में बड़ा फेरबदल किया है। अब 'इनएलिजिबल अलर्ट बोर्ड' पर रखे गए स्टॉक्स की निगरानी की अवधि को कम कर दिया गया है। नई नीति के तहत, यह निगरानी इंडेक्स की इफेक्टिव डेट से ठीक तीन बिज़नेस दिन पहले खत्म हो जाएगी। MSCI का मानना है कि इस बदलाव से उनके रिव्यू प्रोसेस में तेजी आएगी और यह ज्यादा प्रेडिक्टेबल (Predictable) होगा।
भारतीय बाजारों पर असर
इस नए नियम का सीधा असर भारत के बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लिस्टेड स्टॉक्स पर पड़ेगा। इसके अलावा, यह नियम कोरिया एक्सचेंज, ताइवान स्टॉक एक्सचेंज और ताइपे एक्सचेंज पर भी लागू होगा। आमतौर पर, एक्सचेंज इन अलर्ट बोर्ड्स का इस्तेमाल उन स्टॉक्स को फ्लैग करने के लिए करते हैं जो स्पेशल रेगुलेटरी स्क्रूटनी (Regulatory Scrutiny) के दायरे में होते हैं, जैसे कि NSE और BSE पर 'ग्रेडेड सर्विलांस मेजर्स' (Graded Surveillance Measures) के तहत आने वाले स्टॉक्स।
MSCI इंडेक्स में किसी स्टॉक का शामिल होना पैसिव फंड्स (Passive Funds) के लिए महत्वपूर्ण होता है, जिससे उस स्टॉक में निवेश बढ़ता है। अगर कोई स्टॉक रेस्ट्रिक्टेड अलर्ट बोर्ड पर चला जाता है, तो वह इन इंडेक्स के लिए इनएलिजिबल (Ineligible) हो सकता है। निगरानी अवधि को कम करके, MSCI अब यह तय कर रहा है कि एक्सचेंज के अलर्ट लिस्ट में स्टॉक की स्थिति उसे इंडेक्स में शामिल होने या बने रहने से कितनी जल्दी डिसक्वालिफाई (Disqualify) कर सकती है।
आगे क्या?
मार्केट पार्टिसिपेंट्स (Market Participants) को MSCI की अगली घोषणा का इंतजार रहेगा, जो इन अलर्ट बोर्ड्स के ट्रीटमेंट (Treatment) के बारे में 17 जुलाई तक आने की उम्मीद है। यह कन्फर्मेशन (Confirmation) स्पष्ट करेगा कि यह नया तीन-दिन का कट-ऑफ कैसे लागू होगा। जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में ऐसे स्टॉक्स हैं जो अक्सर स्टैंडर्ड और अलर्ट बोर्ड स्टेटस के बीच बदलते रहते हैं, उनके लिए यह बदलाव भविष्य के रीबैलेंसिंग एक्सरसाइज (Rebalancing Exercises) में उनकी शामिल होने की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।
