MCA का बड़ा एक्शन: सीमावर्ती देशों के निदेशकों के लिए नियम सख्त, कंपनियों की बढ़ेगी सख्ती

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
MCA का बड़ा एक्शन: सीमावर्ती देशों के निदेशकों के लिए नियम सख्त, कंपनियों की बढ़ेगी सख्ती

Ministry of Corporate Affairs (MCA) ने उन विदेशी कंपनियों के लिए नियमों को स्पष्ट कर दिया है जो भारत की सीमा से सटे देशों के निदेशकों को नियुक्त करना चाहती हैं। अब इन कंपनियों को e-Sahaj पोर्टल के जरिए सुरक्षा मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

सुरक्षा मंजूरी की अनिवार्यता

MCA ने स्पष्ट किया है कि जिन देशों के साथ भारत की सीमा साझा होती है, वहां के नागरिकों को बोर्ड में शामिल करने से पहले Ministry of Home Affairs से e-Sahaj पोर्टल के माध्यम से सुरक्षा मंजूरी लेना अनिवार्य है। यह नियम DIN (Director Identification Number) आवेदन प्रक्रिया से पहले पूरा करना होगा। सरकार का यह कदम बिजनेस प्रक्रियाओं के सरलीकरण के बावजूद सुरक्षा मानकों से कोई समझौता न करने के संकेत देता है।

रजिस्ट्रेशन और नाम के नए मानक

Registrar of Companies ने नाम पंजीकरण को लेकर भी रुख कड़ा कर दिया है। अब सिर्फ ग्लोबल ब्रांड नाम के आगे 'India' जोड़ना पर्याप्त नहीं है। यदि कंपनी का नाम पहले से मौजूद किसी भारतीय कंपनी के वर्ड-मार्क से मिलता है, तो विदेशी फर्म को No Objection Certificate (NOC) लेना होगा, भले ही उनके पास ग्लोबल ट्रेडमार्क क्यों न हो।

CSR और फाइनेंशियल नॉर्म्स

विदेशी सब्सिडियरी अब CSR के दायरे से बाहर नहीं हैं। यदि कंपनी का नेटवर्थ ₹500 करोड़, टर्नओवर ₹1,000 करोड़ या नेट प्रॉफिट ₹5 करोड़ से ज्यादा है, तो उन्हें अनिवार्य रूप से CSR खर्च करना होगा। साथ ही, शेयर कैपिटल में 'जीरो' वैल्यू के प्रावधान को कंपनियों के एक्ट का उल्लंघन माना गया है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

विदेशी कंपनियों को अब अधिक रेगुलेटरी सतर्कता बरतने की जरूरत है। फॉर्म FC-1 को 30 दिनों के भीतर फाइल न करना या सुरक्षा मंजूरी में देरी होने पर कानूनी अड़चनें और दस्तावेजों के रिजेक्शन का जोखिम बढ़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.