Lloyds Enterprises ने SEBI के साथ एक पुरानी जांच को सुलझा लिया है। प्रमोटर से जुड़ी कंपनियों को दिए गए **₹144.82 करोड़** के अनडिस्क्लोज्ड एडवांसेज के मामले में कंपनी ने **₹4.16 करोड़** का सेटलमेंट किया है।
विवाद की जड़ और समझौता
SEBI की यह जांच Lloyds Enterprises के पुराने फाइनेंशियल गवर्नेंस को लेकर थी। मामला मुख्य रूप से ₹144.82 करोड़ के उन एडवांसेज से जुड़ा है, जो कंपनी ने अपनी प्रमोटर-लिंक्ड संस्थाओं—Cheerful Trade & Realty Developers Pvt Ltd और Triumph Trade & Properties Developers Pvt Ltd को दिए थे।
जांच में पता चला कि FY17 से FY21 के बीच कंपनी ने इन रकमों के लिए न तो प्रॉपर लोन डॉक्यूमेंटेशन किया और न ही इसे नियमों के मुताबिक डिस्क्लोज किया। इस मामले को रफा-दफा करने के लिए कंपनी और उसके पूर्व मैनेजमेंट ने बिना किसी गलती को स्वीकार किए ₹4.16 करोड़ का भुगतान किया है। इसमें कंपनी ने ₹1.28 करोड़, पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश राजनारायण गुप्ता ने ₹1.44 करोड़ और पूर्व CFO वीरेश शंकर सोहनी ने ₹1.44 करोड़ चुकाए हैं।
आगे निवेशकों के लिए क्या है अहम?
कंपनी ने हाल ही में FY24 में Lloyds Metals & Minerals Trading LLP में 7% की पार्टनरशिप हासिल करके इन एडवांसेज की वैल्यू रिकवर करने की कोशिश की थी। जुलाई 2026 में SEBI के होल-टाइम मेंबर्स ने इस सेटलमेंट पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी।
निवेशकों के लिए यह राहत की बात है कि लंबे समय से चली आ रही यह कानूनी अनिश्चितता अब खत्म हो गई है। हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि छोटी कंपनियों में 'रिलेटेड-पार्टी ट्रांजेक्शन' को लेकर सतर्कता बरतनी चाहिए। अब निवेशकों की नजर कंपनी की एनुअल ऑडिट रिपोर्ट्स पर होनी चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि कंपनी ट्रांसपेरेंसी के नए मानकों का पालन कर रही है या नहीं।
