Lighthouse Communities Foundation ने BSE Social Stock Exchange पर अपने 'जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल' (ZCZP) इंस्ट्रूमेंट्स लिस्ट किए हैं। इस कदम से एनजीओ को वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोजेक्ट्स के लिए CSR फंड जुटाने में और पारदर्शिता लाने में मदद मिलेगी।
अब CSR फंड जुटाना हुआ आसान और पारदर्शी
Lighthouse Communities Foundation ने फंडिंग प्रोसेस को औपचारिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। BSE Social Stock Exchange पर ZCZP इंस्ट्रूमेंट्स जारी करके, संगठन ने कॉर्पोरेट डोनर्स के लिए वोकेशनल ट्रेनिंग और करियर गाइडेंस प्रोग्राम्स में अपना CSR फंड लगाने का एक पारदर्शी और रेगुलेटेड रास्ता तैयार किया है।
कैसे काम करते हैं ये इंस्ट्रूमेंट्स?
पारंपरिक शेयरों या बॉन्ड्स के उलट, जो वित्तीय रिटर्न देते हैं, ये इंस्ट्रूमेंट्स डोनेशन की रसीद के रूप में काम करते हैं। चूँकि ये फंड एक रेगुलेटेड एक्सचेंज के जरिए जुटाए जाते हैं, इसलिए एनजीओ को सख्त रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड्स का पालन करना होगा। इससे डोनर्स यह देख पाएंगे कि उनका पैसा कहां खर्च हुआ और उसका सामाजिक असर (Social Impact) क्या रहा। यह कॉर्पोरेट डोनर्स के लिए अपनी CSR जिम्मेदारियों को पूरा करने और ऑडिट ट्रेल बनाए रखने का एक आसान जरिया है।
मौजूदा परफॉर्मेंस और लक्ष्य
फाउंडेशन फिलहाल भारत के 6 राज्यों में 51 सेंटर चला रहा है। इन्होंने बताया है कि वर्कफोर्स में शामिल होने के 1 साल बाद भी उनके प्रतिभागियों की रिटेंशन दर 77% रही है। इस फंडरेजिंग का मुख्य लक्ष्य पुणे में ऑपरेशन्स बढ़ाना है, ताकि 500 और युवाओं को करियर गाइडेंस और वोकेशनल ट्रेनिंग दी जा सके।
पार्टनरशिप और भविष्य की राह
फाउंडेशन ने 2023 की शुरुआत से महाराष्ट्र सरकार के 'स्किल्स, एम्प्लॉयमेंट, एंटरप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन डिपार्टमेंट' के साथ पार्टनरशिप की है। इसके तहत 5,500 से अधिक युवाओं की करियर काउंसलिंग की गई और 3,200 से अधिक लोगों को नौकरी दिलाई गई। अब संस्था का लक्ष्य छत्रपति संभाजीनगर और अमरावती जैसे इलाकों में अपने इस मॉडल को आगे बढ़ाना है। निवेशकों और कॉर्पोरेट पार्टनर्स के लिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या संस्था इन नए इलाकों में विस्तार के दौरान अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बनाए रख पाती है या नहीं।
