Korea Exchange (KRX) ने लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए ट्रेडिंग समय को रात 8:00 बजे तक बढ़ा दिया है। वहीं, भारत में फिलहाल ऐसा कोई बदलाव नहीं है, जहाँ मार्केट केवल 3:40 बजे तक काम करता है।
ग्लोबल बदलाव और भारतीय रुख
Korea Exchange (KRX) ने अपने मार्केट ऑपरेशन्स में एक बड़ा बदलाव करते हुए इक्विटी ट्रेडिंग का समय रात 8:00 बजे तक बढ़ा दिया है। यह नियम 14 सितंबर 2026 से लागू हुआ है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य आफ्टर-मार्केट लिक्विडिटी को कैप्चर करना है, ताकि इन्वेस्टर्स को कॉरपोरेट खुलासों और शाम की हलचल पर रिएक्ट करने के लिए 4 अतिरिक्त घंटे मिल सकें।
भारत की स्थिति क्या है?
भारत में स्थिति बिल्कुल अलग है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने कोई नाइट ट्रेडिंग सेशन शुरू नहीं किया है। 3 अगस्त 2026 को NSE ने क्लोजिंग टाइम को 3:30 बजे से बढ़ाकर 3:40 बजे जरूर किया था, लेकिन यह केवल 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) को एडजस्ट करने के लिए था, न कि ट्रेडिंग विंडो को बढ़ाने के लिए। यहाँ प्राथमिकता प्राइस डिस्कवरी को बेहतर बनाने पर है।
SEBI की क्या है तैयारी?
रेगुलेटर SEBI इस समय ट्रेडिंग के समय को बढ़ाने के बजाय मौजूदा ट्रेड की क्वालिटी पर फोकस कर रहा है। 12 सितंबर 2026 को SEBI ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन और डेरिवेटिव्स सेटलमेंट के नियमों की समीक्षा के लिए एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इस पर 3 अक्टूबर 2026 तक जनता से राय मांगी गई है।
ब्रोकरेज फर्मों की चुनौती
भारतीय मार्केट में ट्रेडिंग का समय बढ़ाने को लेकर काफी व्यावहारिक चुनौतियां हैं। अगर समय बढ़ाया जाता है, तो ब्रोकरेज फर्मों पर स्टाफिंग, साइबर सिक्योरिटी और सर्विलांस का भारी बोझ बढ़ जाएगा। जानकारों का कहना है कि अगर वॉल्यूम में बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई, तो लंबी ट्रेडिंग का मतलब केवल ट्रांजेक्शन कॉस्ट बढ़ना और लिक्विडिटी कम होना हो सकता है। फिलहाल, भारतीय मार्केट अपनी स्थिरता और सेटलमेंट की सटीकता पर ही ध्यान केंद्रित कर रहा है।
