SEBI का नया Closing Auction Session: किरीट सोमैया ने की इसे सस्पेंड करने की मांग

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AuthorNeha Patil|Published at:
SEBI का नया Closing Auction Session: किरीट सोमैया ने की इसे सस्पेंड करने की मांग

पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स से 3 अगस्त, 2026 को लागू हुए नए Closing Auction Session (CAS) को रोकने की मांग की है। बाजार में हेरफेर के डर से उठ रही इस मांग ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसका सीधा असर म्यूचुअल फंड NAV और डेरिवेटिव सेटलमेंट पर पड़ता है।

पूर्व सांसद और चार्टर्ड अकाउंटेंट किरीट सोमैया ने डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स को एक औपचारिक पत्र लिखकर SEBI के नए Closing Auction Session (CAS) को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड करने की अपील की है। यह नया सिस्टम 3 अगस्त, 2026 को पुराने Volume-Weighted Average Price (VWAP) मॉडल की जगह लाया गया था। हालांकि, 27 अगस्त, 2026 को ट्रेडिंग के अंतिम मिनटों में बेंचमार्क इंडेक्स में आई अचानक भारी गिरावट और उठापटक के बाद से ही यह सिस्टम निवेशकों के निशाने पर है।

सोमैया का तर्क है कि CAS का मौजूदा स्ट्रक्चर ऑर्डर को अलग-अलग बुक्स में बांट देता है, जिससे बाजार के अंतिम समय में लिक्विडिटी की कमी हो रही है और कीमतों में अस्थिरता बढ़ रही है। उन्होंने पुराने VWAP सिस्टम को बहाल करने की वकालत की है, जब तक कि बाजार को आर्टिफिशियल वोलेटिलिटी से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम न किए जाएं।

निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है यह?

किसी भी शेयर की क्लोजिंग प्राइस सिर्फ एक नंबर नहीं, बल्कि पूरे फाइनेंशियल इकोसिस्टम का आधार है। म्यूचुअल फंड इसी क्लोजिंग प्राइस के आधार पर डेली NAV तय करते हैं, जो आपके निवेश की वैल्यू तय करता है। इसके अलावा, फ्यूचर्स और ऑप्शंस जैसे डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स का सेटलमेंट भी इन्हीं आंकड़ों पर निर्भर होता है। यदि क्लोजिंग प्राइस में हेरफेर या भारी उतार-चढ़ाव होता है, तो इसका सीधा नुकसान रिटेल और इंस्टीट्यूशनल निवेशकों को उठाना पड़ सकता है।

आलोचकों का मानना है कि हाई वोलेटिलिटी या मंथली एक्सपायरी के दौरान यह ऑक्शन सिस्टम बड़े ऑर्डर्स को संभालने में सक्षम नहीं है, जिससे क्लोजिंग प्राइस पूरे दिन के कामकाज को सही ढंग से नहीं दर्शा पाता।

SEBI का क्या कहना है?

इस मांग के बावजूद, SEBI का रुख फिलहाल सख्त है। रेगुलेटर का कहना है कि वे लगातार बाजार की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। अब तक SEBI को नए सिस्टम में किसी बड़े स्ट्रक्चरल हेरफेर के सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन वे रियल-टाइम आधार पर इसके नतीजों का मूल्यांकन कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार या SEBI इस मांग पर क्या कदम उठाते हैं और क्या बाजार में आने वाली इस अस्थिरता को रोकने के लिए कोई बदलाव किया जाता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.