पूर्व सांसद Kirit Somaiya ने SEBI को चिट्ठी लिखकर 27 अगस्त को BSE Sensex में आई **2,200 पॉइंट** की भारी गिरावट की जांच करने को कहा है। उनका आरोप है कि नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम में खामियों के कारण मार्केट में हेरफेर का खतरा बढ़ गया है।
क्या है क्लोजिंग ऑक्शन का विवाद?
हाल ही में शुरू हुए इस क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (3:20 PM से 3:30 PM) का मकसद दिन का एक सटीक क्लोजिंग प्राइस तय करना था। लेकिन Kirit Somaiya ने SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे को भेजे पत्र में साफ कहा है कि इस सिस्टम के डिजाइन में बड़ी संरचनात्मक खामियां हैं। मुख्य मुद्दा लिक्विडिटी की कमी है, क्योंकि कैश मार्केट की ट्रेडिंग 3:15 PM पर खत्म हो जाती है, जिससे ऑक्शन के दौरान मार्केट का सपोर्ट नहीं मिलता। इस लिक्विडिटी गैप के चलते छोटे ऑर्डर्स भी मार्केट में बड़ी हलचल पैदा कर रहे हैं, जिससे मैनिपुलेशन की गुंजाइश बन रही है।
SEBI का सख्त रुख
दिलचस्प बात यह है कि 13 अगस्त को भी प्राइस मैनिपुलेशन के संदिग्ध मामलों के बाद SEBI ने कड़ी कार्रवाई की थी। इसके बावजूद, SEBI का रुख फिलहाल सख्त है। चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने स्पष्ट कर दिया है कि वे क्लोजिंग ऑक्शन पॉलिसी को वापस नहीं लेंगे, क्योंकि यह बाजार के आधुनिकीकरण (Modernization) की दिशा में एक जरूरी कदम है।
निवेशकों के लिए यह स्थिति चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि क्लोजिंग प्राइस ही पोर्टफोलियो वैल्यूएशन और डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स का बेंचमार्क होता है। अब देखना यह होगा कि क्या रेग्युलेटर इस सिस्टम में कोई तकनीकी बदलाव करता है या निवेशक इसी अनिश्चितता के बीच ट्रेड करने को मजबूर रहेंगे।
