GST Notices: कर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला, बंद हो चुके केसों के डुप्लीकेट नोटिस होंगे वापस

SEBIEXCHANGE
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
GST Notices: कर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला, बंद हो चुके केसों के डुप्लीकेट नोटिस होंगे वापस

कर्नाटक कमर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट उन सभी डुप्लीकेट GST नोटिस को रद्द कर रहा है, जो पहले ही ऑडिट होकर बंद हो चुके हैं। यह कदम ऑटोमेटेड टूल्स की गलतियों को सुधारने और कंपनियों पर बढ़ते अनुपालन के दबाव को कम करने के लिए उठाया गया है।

कर्नाटक कमर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट ने उन ताजा GST नोटिसों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो पहले से निपटाए जा चुके ऑडिट मामलों के लिए गलती से भेजे गए थे। कमिश्नर विपुल बंसल ने स्पष्ट किया है कि ये डुप्लीकेट नोटिस राज्य के नए ऑटोमेटेड डेटा एनालिटिक्स टूल्स में तकनीकी खामियों के कारण जारी हुए थे, जो कि स्कूटनी वाले मामलों को ट्रैक करने के लिए बनाए गए थे, लेकिन उन्होंने उन फाइलों को भी टारगेट कर लिया जो पहले ही क्लोज हो चुकी थीं।

कारोबारियों के लिए यह राहत की खबर है। बार-बार मिलने वाले नोटिस कंपनियों का कीमती समय और संसाधन बर्बाद करते हैं। अपनी गलती मानकर नोटिस वापस लेने का यह फैसला टैक्सपेयर्स पर प्रशासनिक बोझ को काफी कम करेगा।

भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए, राज्य सरकार अपनी प्रशासनिक समय-सारणी में बदलाव करने की योजना बना रही है। अब विभाग की कोशिश यह होगी कि हर फाइनेंशियल ईयर शुरू होने से पहले ही ऑडिट नोटिस जारी कर दिए जाएं, ताकि कंपनियों को अपने रिकॉर्ड तैयार रखने के लिए पर्याप्त समय मिले और ऑपरेशंस में कोई बाधा न आए।

यह कदम GST ढांचे के तहत 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' की राष्ट्रीय चर्चाओं के अनुरूप है। इंडस्ट्री के जानकारों ने अक्सर CGST एक्ट की धारा 74 (Section 74) के व्यापक इस्तेमाल पर चिंता जताई है, जो धोखाधड़ी या तथ्यों को छुपाने से जुड़ी है। आलोचकों का तर्क है कि इस सख्त प्रावधान का उपयोग मामूली प्रक्रियात्मक गलतियों के लिए भी किया जा रहा है, जिससे भारी पेनल्टी लग रही है।

फिलहाल Central Board of Indirect Taxes and Customs (CBIC) ऑडिट ढांचे में सुधार पर विचार कर रहा है। इंडस्ट्री की नजर इस बात पर है कि क्या धारा 74 का इस्तेमाल केवल गंभीर मामलों तक सीमित रहेगा। निवेशकों और कॉरपोरेट टैक्सपेयर्स के लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य विभाग इन डुप्लीकेट मामलों को कितनी तेजी से हल करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.