ग्लोबल ब्रोकरेज Jefferies ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर कवरेज शुरू कर दिया है। ब्रोकरेज ने स्टॉक के लिए **₹2,085** का टारगेट सेट किया है और इसके नए बिजनेस वर्टिकल्स जैसे गोल्ड और कमोडिटी ट्रेडिंग में ग्रोथ की उम्मीद जताई है।
ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस Jefferies ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के लिए पॉजिटिव आउटलुक के साथ ₹2,085 का टारगेट प्राइस तय किया है। चूंकि NSE अभी शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है, इसलिए इसके शेयर अनलिस्टेड मार्केट में ट्रेड होते हैं। हालांकि, ब्रोकरेज की यह एंट्री अनलिस्टेड मार्केट के निवेशकों के लिए एक बड़ी खबर है।
SEBI के नियमों से मिली राहत
ब्रोकरेज की इस सकारात्मक सोच के पीछे SEBI के हालिया फैसले भी अहम हैं। रेगुलेटर ने एक्सपायर होने वाले डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए 30-मिनट का VWAP फिर से बहाल कर दिया है। इससे डेरिवेटिव्स मार्केट में होने वाली वोलैटिलिटी (Volatility) कम होगी और क्लोजिंग प्रोसेस अधिक स्टेबल बनेगा।
रेवेन्यू का नया मॉडल
NSE अब तक अपने बड़े रेवेन्यू के लिए इक्विटी ऑप्शंस पर निर्भर रहा है, लेकिन अब कंपनी रणनीति बदल रही है। NSE अब इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स, कमोडिटी फ्यूचर्स और म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म जैसे नए सेगमेंट में तेजी से विस्तार कर रहा है।
क्या हैं कंपनी के लक्ष्य?
Jefferies का मानना है कि फाइनेंशियल ईयर 2029 तक कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन बढ़कर 78% तक पहुंच सकता है, जो 2026 में 76% रहने का अनुमान है। कंपनी की टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और को-लोकेशन सर्विसेज की बढ़ती मांग इसकी ग्रोथ में बड़ी भूमिका निभाएगी।
निवेशकों के लिए सावधानी
NSE के निवेशकों को रेगुलेटरी जोखिमों पर नजर रखनी चाहिए। अगर SEBI भविष्य में रिटेल स्पेकुलेशन को रोकने के लिए F&O सेगमेंट पर और सख्त नियम लाता है, तो इसके ट्रांजेक्शन रेवेन्यू पर असर पड़ सकता है। साथ ही, डिजिटल एक्सचेंज होने के नाते साइबर सिक्योरिटी और टेक्निकल ग्लिच (Technical Glitch) जैसे रिस्क भी बने हुए हैं। अनलिस्टेड स्टॉक होने के कारण इसमें लिक्विडिटी का जोखिम भी हमेशा रहता है, जिसे ध्यान में रखना जरूरी है।
