ग्लोबल ट्रेडिंग फर्म Jane Street ने मार्किट मैनिपुलेशन केस में Securities Appellate Tribunal (SAT) का दरवाजा खटखटाया है। कंपनी ने **₹4,843 करोड़** जमा करने के बाद अब इंटरनल रिपोर्ट्स तक पहुंच की मांग की है और तर्क दिया है कि पुरानी जांचों में उसे क्लीन चिट मिल चुकी थी।
रेगुलेटरी जांच पर बड़ा विवाद
Jane Street और भारतीय नियामकों के बीच यह कानूनी लड़ाई अब काफी पेचीदा हो गई है। कंपनी का कहना है कि जुलाई 2025 के अंतरिम ऑर्डर को चुनौती देने के लिए उन्हें SEBI और National Stock Exchange (NSE) के उन इंटरनल दस्तावेजों और कम्युनिकेशन तक एक्सेस चाहिए, जिसके आधार पर उन पर कार्रवाई हुई है।
क्या है पूरा मामला?
आरोप है कि फर्म ने Bank Nifty इंडेक्स में हेरफेर करके अपने डेरिवेटिव्स शॉर्ट पोजीशंस से गलत मुनाफा कमाया। इस पर SEBI ने कंपनी को ₹4,843 करोड़ का डिस्गॉर्जमेंट करने का निर्देश दिया था। कंपनी ने यह रकम एस्क्रो अकाउंट में जमा तो कर दी है, लेकिन अब वह अपनी साख बचाने की लड़ाई लड़ रही है।
कंपनी का बचाव और दलीलें
Jane Street के वकीलों का तर्क है कि नवंबर 2024 में NSE और दिसंबर 2024 में SEBI के इंटीग्रेटेड सर्विलांस डिपार्टमेंट द्वारा की गई जांचों में कोई गड़बड़ी नहीं मिली थी। कंपनी का आरोप है कि मौजूदा जांच एक UAE-आधारित हेज फंड की शिकायत से प्रेरित है। अब कंपनी यह साबित करना चाहती है कि रेगुलेटर के पुराने निष्कर्ष और वर्तमान आरोप एक-दूसरे के विपरीत हैं।
आगे की राह
यह मामला भारत के डेरिवेटिव्स मार्केट में हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग और एल्गोरिदम के प्रति रेगुलेटरी सख्ती को दर्शाता है। फिलहाल, SAT ने इस मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर, 2026 के लिए तय की है, जहां इन दस्तावेजों की गोपनीयता और पारदर्शिता पर फैसला लिया जाएगा।
