2 सितंबर, 2026 को जियोपॉलिटिकल तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद हुए। हालांकि, Nifty 50 और Sensex की कमजोरी के बावजूद, बड़े संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) ने बाजार में **₹9,501 करोड़** के शेयर खरीदे हैं।
बाजार का हाल और गिरावट की वजह
2 सितंबर, 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखी गई। Nifty 50 में 0.59% की गिरावट आई और यह 23,914.45 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि BSE Sensex 0.49% टूटकर 76,570.35 पर रहा। इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को माना जा रहा है। इसके कारण ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल (Crude Oil) $95 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जिससे भारत में महंगाई और इंपोर्ट कॉस्ट बढ़ने का डर पैदा हो गया है।
संस्थागत निवेशकों का दांव
बाजार में जारी डर के बीच भी संस्थागत निवेशकों का भरोसा कायम है। डेटा के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹6,688 करोड़ के नेट शेयर खरीदे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी ₹2,813 करोड़ का निवेश किया। इस तरह कुल ₹9,501 करोड़ का पैसा बाजार में लगाया गया, जो यह दर्शाता है कि बड़े निवेशक गिरावट को खरीदारी के मौके के रूप में देख रहे हैं।
आगे क्या होगा?
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का सीधा असर Nifty Auto जैसे सेक्टर पर दिखा है, क्योंकि इससे रॉ मटीरियल की लागत बढ़ने की आशंका है। फिलहाल, निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या Nifty अपने 23,800 के सपोर्ट लेवल को बचा पाएगा या नहीं। जियोपॉलिटिकल हालातों के साथ ही सेंट्रल बैंक के महंगाई पर बयानों पर भी सबकी नजर बनी हुई है।
