बाज़ार में साख बढ़ाने की दोहरी रणनीति
SEBI की चेयरपर्सन तुहिन कांता पांडे की तरफ से आए ये बयान भारतीय पूंजी बाज़ार के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ का संकेत देते हैं। इनसाइडर ट्रेडिंग पर कड़ाई और विदेशी निवेशकों के लिए प्रवेश को आसान बनाने पर जोर, दोनों ही एक ऐसी रणनीति का हिस्सा हैं जिसका मकसद पूंजी की भारी निकासी को रोकना और निवेशकों का भरोसा बढ़ाना है। यह कदम बाज़ार की साख को मजबूत करने के लिए ज़रूरी है, जो विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए पहला कदम है।
इनसाइडर ट्रेडिंग पर वार और विदेशी पूंजी का फ्लो
SEBI अब न केवल पारंपरिक कॉर्पोरेट अंदरूनी सूत्रों पर, बल्कि बैंकों और कंसल्टिंग फर्मों जैसी संस्थाओं पर भी कड़ी नज़र रख रहा है। हाल ही में, IndusInd Bank के एग्जीक्यूटिव्स और PwC व EY जैसी कंपनियों पर जांच के नोटिस इसी ओर इशारा करते हैं। FY 2024-25 में SEBI ने 287 इनसाइडर ट्रेडिंग मामलों की जांच की, जो पिछले साल के 175 मामलों से काफी ज्यादा है।
यह सख्ती ऐसे समय में आई है जब 2025 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय इक्विटी से लगभग USD 18.9 बिलियन की भारी निकासी की थी। हालांकि फरवरी 2026 में ₹22,615 करोड़ का इनफ्लो देखा गया, लेकिन यह कई महीनों की बिकवाली के बाद आया है और विदेशी पूंजी के लिए साल काफी चुनौतीपूर्ण रहा है।
विदेशी निवेश को बढ़ावा: 5 दिन में एंट्री!
SEBI की योजना विदेशी निवेशकों के लिए नियमों को सरल बनाने की है, जिसमें डॉक्यूमेंटेशन कम करना और FPIs के लिए 5-दिन की एंट्री प्रक्रिया का लक्ष्य शामिल है। यह सीधे तौर पर पूंजी की निकासी के ट्रेंड का जवाब है। दूसरी ओर, फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) में मजबूती देखी गई है, अप्रैल-दिसंबर 2025-26 में USD 47.87 बिलियन का इनफ्लो आया, जो 18% की बढ़ोतरी है।
इसके बावजूद, भारतीय इक्विटी में FPI की हिस्सेदारी दिसंबर 2025 तिमाही में घटकर 16.7% रह गई, जो 15 साल का निचला स्तर है। यह अस्थिर पोर्टफोलियो पूंजी को बनाए रखने की चुनौती को दर्शाता है।
डेरिवेटिव्स में रिटेल निवेशकों का दर्द
SEBI की चिंताएं डेरिवेटिव्स बाज़ार को लेकर भी हैं, जहां रिटेल निवेशक भारी नुकसान झेल रहे हैं। SEBI के अध्ययनों से पता चला है कि FY25 में लगभग 90% रिटेल निवेशकों ने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में पैसा गंवाया, और कुल नुकसान ₹1 लाख करोड़ से अधिक रहा। इस पर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रमुख ने डेरिवेटिव्स प्रतिभागियों के लिए न्यूनतम एंट्री आवश्यकताओं का प्रस्ताव दिया है, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप है।
वैश्विक स्तर पर, AI-केंद्रित बाजारों (जैसे ताइवान और दक्षिण कोरिया) की ओर पूंजी का रुझान भारत के लिए एक और चुनौती पेश कर रहा है। साथ ही, जनवरी 2026 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का 92.29 के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचना भी विदेशी इनफ्लो के लिए एक बाधा है।
आगे का रास्ता
SEBI के लिए आगे का रास्ता नियामक दृष्टिकोण को लगातारปรับ (recalibrate) करने का है। FPI नियमों को सरल बनाने का काम जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, नियामक को बाजार के दुरुपयोग के खिलाफ सख्त प्रवर्तन और खुदरा निवेशकों को अत्यधिक सट्टेबाजी से बचाने के लिए मजबूत तंत्र के साथ इन प्रयासों को संतुलित करना होगा। इन रणनीतियों की प्रभावशीलता वैश्विक पूंजी प्रवाह की गतिशीलता और प्रौद्योगिकी-संचालित अर्थव्यवस्थाओं में निवेश की दौड़ के खिलाफ परखी जाएगी। स्थिर, दीर्घकालिक पूंजी को आकर्षित करना और बनाए रखना भारत के निरंतर आर्थिक विकास के लिए सर्वोपरि रहेगा।