अगस्त 2026 में शुरू हुई नई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) में अब स्थिरता दिख रही है। शुरुआती उठापटक के बाद, रेगुलेटर SEBI के सख्त कदमों से शेयर की कीमतें तय होने की नई प्रणाली निवेशकों के लिए बेहतर हो रही है।
नई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में दिख रही स्थिरता
भारतीय शेयर बाजारों में 3 अगस्त, 2026 से शुरू हुई नई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) में अब धीरे-धीरे स्थिरता आने लगी है। लॉन्च के शुरुआती दिनों में कुछ भ्रम और असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिला था, जिससे कई ट्रेडर्स हैरान थे। लेकिन अब यह सिस्टम स्मूथली काम कर रहा है। यह दिन के आखिर में शेयरों की क्लोजिंग प्राइस तय करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव है।
VWAP की जगह CAS का आना
CAS को पुरानी वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) विधि के बदलने के लिए लाया गया था। पहले, क्लोजिंग प्राइस दोपहर 3:00 बजे से 3:30 बजे के बीच हुए ट्रेडों के औसत से तय होता था। इसमें खामियां थीं, जैसे कि बाजार के आखिरी मिनटों में बड़े ऑर्डर्स से क्लोजिंग प्राइस में हेरफेर की गुंजाइश थी। इंडेक्स फंड जैसे बड़े निवेशकों के लिए, यह अस्थिरता ट्रैकिंग एरर पैदा करती थी। नई ऑक्शन मैकेनिज्म दोपहर 3:15 से 3:35 बजे के बीच खरीदे और बेचे जाने वाले ऑर्डर्स को एक साथ पूल करके एक सटीक प्राइस खोजने का लक्ष्य रखती है।
रेगुलेटर SEBI का सख्त कदम
शुरुआत में, खासकर डेरिवेटिव्स एक्सपायरी वाले दिनों में, कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव देखे गए, जिससे मार्केट पार्टिसिपेंट्स चिंतित थे। मार्केट की अखंडता की रक्षा के लिए, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने तुरंत कार्रवाई की। 19 अगस्त, 2026 को, SEBI ने Copthall Mauritius Investment Ltd और Mansi Share and Stock Broking के खिलाफ एक अंतरिम आदेश जारी किया। SEBI का आरोप था कि इन संस्थाओं ने 13 अगस्त, 2026 को साप्ताहिक ऑप्शंस एक्सपायरी के दौरान सेंसेक्स की क्लोजिंग प्राइस में हेरफेर किया था।
SEBI ने इन संस्थाओं से कथित तौर पर ₹3.67 करोड़ का अनुचित लाभ जब्त किया और उन्हें सिक्योरिटीज मार्केट से बैन कर दिया। इस सख्त कार्रवाई ने नए सिस्टम के शुरुआती सत्रों में देखे गए सट्टा व्यवहार को कम करने में मदद की।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
आम निवेशकों के लिए, CAS में स्थिरता एक सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि बाजार नए नियमों के अनुकूल हो रहा है और रेगुलेटर किसी भी दुरुपयोग पर कड़ी नजर रख रहा है। ट्रेडिंग वॉल्यूम पर कोई खास असर नहीं पड़ा है, लेकिन ट्रेडिंग का तरीका थोड़ा बदला है। पार्टिसिपेंट्स अब अनिश्चितता से बचने के लिए दिन में पहले ही अपनी एक्टिविटी कर रहे हैं।
आगे निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि यह सिस्टम हाई-वोलेटिलिटी वाले दिनों, जैसे मंथली और वीकली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी, को कैसे संभालता है। भले ही सिस्टम अधिक अनुमानित हो रहा है, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि क्लोजिंग प्राइस की खोज की प्रक्रिया अब अधिक केंद्रित है, जिससे सेशन के अंतिम मिनटों में कीमतों में तेजी से बदलाव आ सकता है।
