Sebi ने बदली सेविंग्स की गणना का तरीका, FY25 के आंकड़े बेहतर
Securities and Exchange Board of India (Sebi) ने बचत की गणना के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। इस नए मेथड के चलते फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) के लिए भारत की ग्रॉस सेविंग्स रेट (Gross Savings Rate) में करीब 47 बेसिस पॉइंट्स (Basis Points) का इजाफा होने की उम्मीद है। यह नई गणना हाउसहोल्ड सेविंग्स का सिक्योरिटीज मार्केट में निवेश को और सटीक रूप से दर्शाएगी।
सेविंग्स के आंकड़े हुए बेहतर
Sebi के अधिकारियों की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, नए तरीके से ग्रॉस सेविंग्स रेट को GDP के प्रतिशत के रूप में FY25 के लिए 34.94% पर रिवाइज किया गया है, जो पुराने तरीके से 34.47% था। इसमें अब फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स (Financial Instruments) की एक बड़ी रेंज को शामिल किया गया है। इसी के साथ, FY25 के लिए हाउसहोल्ड सेविंग्स-टू-जीडीपी (Household Savings-to-GDP) रेशियो अब 21.7% हो गया है, जो पहले 21.23% था। नेट हाउसहोल्ड फाइनेंशियल सेविंग्स (Net Household Financial Savings) में भी सुधार हुआ है, जो अब GDP का 7.10% है, जबकि पहले इसका अनुमान 6.63% था।
किन इंस्ट्रूमेंट्स को किया गया शामिल?
पहले Reserve Bank of India (RBI) मुख्य रूप से इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स (Individual Investors) के म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) एसेट्स पर ध्यान केंद्रित करता था। Sebi की रिवाइज्ड मैथडोलॉजी में इक्विटी (Equities), डेट (Debt), रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs), इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs), और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) जैसे एसेट्स को भी शामिल किया गया है।
इस नए फ्रेमवर्क के तहत, सिक्योरिटीज मार्केट के जरिए हाउसहोल्ड सेविंग्स FY25 में बढ़कर ₹6.9 ट्रिलियन पहुंच गई है, जो पहले के ₹5.42 ट्रिलियन के अनुमान से काफी ज्यादा है। यह बढ़त पारंपरिक एसेट्स जैसे गोल्ड (Gold) और रियल एस्टेट (Real Estate) से हटकर फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स की ओर बढ़ते रुझान को बेहतर ढंग से दिखाती है।
निवेशकों के व्यवहार में बदलाव
रिसर्च पेपर में इस बात पर जोर दिया गया है कि प्राइमरी सोर्स से वास्तविक ग्रैन्युलर डेटा (Granular Data) का उपयोग हाउसहोल्ड सेविंग्स का अधिक यथार्थवादी और सटीक दृष्टिकोण प्रदान करता है। इस नई गणना में इमर्जिंग एसेट क्लासेज (Emerging Asset Classes) और नॉन-प्रॉफिट इंस्टीट्यूशंस (Non-profit Institutions) सहित विभिन्न सेगमेंट्स से सेकेंडरी मार्केट डेटा (Secondary Market Data) को शामिल किया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि इस स्टडी में पाया गया कि FY25 में हाउसहोल्ड्स डायरेक्ट इक्विटी (Direct Equity) के नेट सेलर्स (Net Sellers) थे, जिन्होंने ₹54,786 करोड़ के शेयर बेचे। पिछले साल यह आंकड़ा ₹69,329 करोड़ था। ऐसा तब हुआ जब इन्वेस्टर्स म्यूचुअल फंड में सक्रिय रूप से निवेश कर रहे थे। यह ट्रेंड भारतीय रिटेल इन्वेस्टर्स (Retail Investors) के मैच्योर (Mature) होने का संकेत देता है, जो डायरेक्ट स्टॉक होल्डिंग्स पर प्रॉफिट बुक कर रहे हैं और प्रोफेशनल मैनेज्ड फंड्स (Professionally Managed Funds) में नया पैसा लगा रहे हैं।
