India's F&O Market: SEBI के कड़े नियमों और बढ़ते STT से ट्रेडर्स की कमर टूटी!

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AuthorMehul Desai|Published at:
India's F&O Market: SEBI के कड़े नियमों और बढ़ते STT से ट्रेडर्स की कमर टूटी!

भारतीय डेरिवेटिव्स मार्केट में बड़ा बदलाव आया है। SEBI के नए नियमों के कारण एक्टिव रिटेल ट्रेडर्स की संख्या में **20%** की गिरावट आई है और यह आंकड़ा घटकर **79 लाख** रह गया है। वहीं, पिछले तीन सालों में **STT** (Securities Transaction Tax) में तीन बार की गई बढ़ोतरी ने निवेशकों की लागत को और बढ़ा दिया है।

भारतीय डेरिवेटिव्स मार्केट इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। मार्केट में रिस्क को कम करने के लिए फाइनेंशियल रेगुलेटर्स ने कॉन्ट्रैक्ट साइज में बदलाव और वीकली एक्सपायरी ऑप्शन को सीमित करने जैसे कड़े कदम उठाए हैं। इसका असर यह हुआ है कि रिटेल ट्रेडर्स की संख्या जो पहले 98 लाख थी, वह अब गिरकर 79 लाख हो गई है। यह गिरावट उस समय आई है जब रिटेल सेगमेंट को फाइनेंशियल ईयर 2026 में कुल ₹91,685 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है।

बढ़ते ट्रेडिंग खर्च का बोझ

SEBI जहां व्यवहारिक बदलाव लाने की कोशिश कर रहा है, वहीं सरकारी फिस्कल पॉलिसी के कारण हालात बदल गए हैं। पिछले तीन सालों में STT को तीन बार बढ़ाया गया है। मिड-सितंबर 2026 तक, इस टैक्स से होने वाली कमाई में 53% का भारी उछाल आया है। यानी ट्रेडिंग वॉल्यूम घटने के बावजूद सरकारी खजाना भर रहा है। आम निवेशक के लिए समस्या यह है कि STT ट्रेड के समय नहीं, बल्कि कॉन्ट्रैक्ट नोट में दिखता है, जिससे ट्रेड की असली लागत का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

एल्गोरिदम का जलवा, रिटेल का घाटा

टैक्स का यह ढांचा सभी के लिए एक समान है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जहां एक तरफ रिटेल ट्रेडर्स नुकसान झेल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ एल्गोरिदम और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग डेस्क ने इसी दौरान ₹44,483 करोड़ का ग्रॉस प्रॉफिट कमाया है। टैक्स का बोझ समान होने के कारण छोटे निवेशकों पर इसका असर कहीं ज्यादा भारी पड़ रहा है।

आगे की राह

रेगुलेटर्स के सामने मार्केट कंट्रोल और प्रेडिक्टेबिलिटी के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती है। क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में बदलाव के लिए मिले 20,000 सार्वजनिक सुझावों ने दिखाया है कि रेगुलेटर्स भी अब फीडबैक के आधार पर अपने कदमों में सुधार कर रहे हैं। ट्रेडर्स के लिए अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या भविष्य में नियम सिर्फ टैक्स बढ़ाने तक सीमित रहेंगे या और अधिक पारदर्शी और सटीक (Targeted) तरीके अपनाए जाएंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.