भारतीय शेयर बाजार में लगातार सातवें हफ्ते गिरावट का सिलसिला जारी है। विदेशी निवेशकों (FIIs) ने बाजार से ₹11,490 करोड़ की भारी निकासी की है, जिसके पीछे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुख्य वजह हैं। हालांकि, घरेलू निवेशकों (DIIs) ने ₹16,398 करोड़ का निवेश कर बाजार को बड़ा सहारा दिया है।
बाजार पर दबाव क्यों?
ग्लोबल मार्केट से मिल रहे खराब संकेतों के बीच BSE Sensex और Nifty 50 दोनों ही लाल निशान में बंद हुए हैं। बैंक निफ्टी और मिडकैप इंडेक्स में भी तेज बिकवाली देखी गई है। बिकवाली की मुख्य वजह FIIs का रुख है, जो लगातार छठे हफ्ते नेट सेलर बने हुए हैं। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के 5.10% के पार जाने से विदेशी निवेशक सुरक्षित एसेट्स की ओर भाग रहे हैं, जिसका सीधा असर भारतीय इक्विटी मार्केट पर पड़ रहा है। इसके साथ ही, ब्रेंट क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें भी महंगाई का डर बढ़ा रही हैं।
DIIs का दमदार बचाव
विदेशी निकासी के बावजूद, भारतीय बाजार पूरी तरह से नहीं टूटा है। इसका श्रेय Domestic Institutional Investors (DIIs) को जाता है, जिन्होंने इस हफ्ते ₹16,398 करोड़ का निवेश किया है। पूरे सितंबर महीने में DIIs ने ₹52,617 करोड़ बाजार में झोंके हैं, जिसने गिरावट को थामने में बड़ी भूमिका निभाई है।
डेट मार्केट में राहत
दिलचस्प बात यह है कि इक्विटी से पैसा निकलने के बावजूद, डेट मार्केट अभी भी स्थिर है। विदेशी निवेशकों ने भारतीय डेट इंस्ट्रूमेंट्स में ₹885 करोड़ का नेट निवेश किया है। वे विशेष रूप से सरकारी सिक्योरिटीज (FAR) में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या घरेलू निवेश की यह ताकत FIIs की बिकवाली को लंबे समय तक झेल पाएगी या नहीं।
