अक्टूबर के महीने में भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर ऑप्शंस प्रीमियम टर्नओवर में **43%** की भारी तेजी दर्ज की गई, जो **₹1,061 बिलियन** के स्तर पर पहुंच गया।
अक्टूबर 2026 में भारतीय डेरिवेटिव्स मार्केट ने पिछले तीन महीनों की सुस्ती को पीछे छोड़ते हुए एक शानदार वापसी की है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और BSE के संयुक्त डेली ऑप्शंस प्रीमियम टर्नओवर में 43% का उछाल आया है, जो बताता है कि मार्केट में वोलेटिलिटी बढ़ते ही ट्रेडर्स का रुझान वापस लौट आया है।\n\n### BSE की धूम, NSE को पछाड़ा\nइस तेजी में BSE ने सबको चौंका दिया है। एक्सचेंज ने रिकॉर्ड ₹37,400 करोड़ का प्रीमियम टर्नओवर हासिल किया, जो कि 61% की जबरदस्त बढ़ोतरी है। डेली कॉन्ट्रैक्ट्स के मामले में भी BSE ने 183 मिलियन के स्तर को छू लिया, जिसमें 68% की वृद्धि दिखी, जबकि NSE का आंकड़ा 177 मिलियन रहा, जिसमें 17% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।\n\n### MCX पर क्यों छाई मायूसी?\nइक्विटी मार्केट में जहां जोश था, वहीं कमोडिटी एक्सचेंज MCX पर दबाव देखने को मिला। यहाँ फ्यूचर्स टर्नओवर 24% गिरकर ₹497 बिलियन रह गया। गिरावट का सबसे ज्यादा असर गोल्ड (37%), सिल्वर (22%) और क्रूड ऑयल (18%) फ्यूचर्स पर पड़ा।\n\nएक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रेडर्स फिलहाल कमोडिटी की तुलना में इक्विटी इंडेक्स में ज्यादा जोखिम लेकर मुनाफा कमाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, भारी वॉल्यूम का मतलब लिक्विडिटी तो है, लेकिन यह हाई-रिस्क स्ट्रैटेजी और भारी लेवरेज (Leverage) की ओर भी इशारा करता है। अब देखना यह होगा कि बाजार की यह तेजी बरकरार रहती है या वोलेटिलिटी कम होने के साथ वॉल्यूम में फिर से कमी आती है।
