बुधवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार की शुरुआती बढ़त गायब हो गई और बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। इस गिरावट के चलते 322 शेयर अपने 52-वीक लो (52-week low) पर पहुंच गए हैं, जबकि क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें निवेशकों की चिंताएं बढ़ा रही हैं।
बुधवार का दिन भारतीय निवेशकों के लिए काफी मुश्किल भरा रहा, जहां Nifty 50 और Sensex अपनी शुरुआती तेजी को बरकरार नहीं रख पाए। बाजार में मची बिकवाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 322 शेयर अपने 52-वीक के निचले स्तर पर लुढ़क गए। यह गिरावट केवल चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे बाजार में फैली हुई थी।\n\n### बाजार की खस्ता हालत\nBSE पर आंकड़ों को देखें तो स्थिति काफी गंभीर थी। दिन के अंत तक 3,397 शेयर लाल निशान में बंद हुए, जबकि सिर्फ 873 शेयरों में तेजी देखी गई। बाजार के दबाव का आलम यह रहा कि 306 शेयरों में लोअर सर्किट लग गया। यह साफ दर्शाता है कि निवेशक हर सेक्टर में बिकवाली कर रहे हैं।\n\n### IT सेक्टर बना ढाल\nइस गिरते बाजार में IT सेक्टर के शेयरों ने पोर्टफोलियो को थोड़ी राहत दी। Infosys में 2.68% की तेजी रही, वहीं Tech Mahindra और Tata Consultancy Services भी हरे निशान में बंद हुए। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अनिश्चितता के दौर में निवेशक अक्सर IT शेयरों का रुख करते हैं क्योंकि उनकी कमाई डॉलर में होती है। इसके अलावा UltraTech Cement ने भी बाजार के रुख के विपरीत 1.62% की बढ़त दर्ज की।\n\n### क्यों बढ़ रहा है दबाव?\nबाजार में गिरावट की मुख्य वजह ऑटो और फाइनेंस सेक्टर में बिकवाली रही। Bajaj Finance और Adani Enterprises जैसे बड़े शेयरों पर काफी दबाव देखा गया। सबसे बड़ी चिंता ग्लोबल एनर्जी मार्केट है, जहां WTI क्रूड ऑयल $99 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। सप्लाई को लेकर डर का माहौल है और भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह महंगाई और चालू खाते के घाटे का बड़ा कारण बन सकता है।\n\n### आगे की राह\nभारतीय रुपया फिलहाल ₹94.72 प्रति डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा है और Reserve Bank of India इसे ₹95 के स्तर पर बचाने की कोशिश में जुटा है। टेक्निकल चार्ट पर Nifty अपने सपोर्ट लेवल से नीचे फिसल गया है। एनालिस्ट्स का मानना है कि 22,670-22,690 का लेवल फिलहाल सपोर्ट का काम कर सकता है, जबकि ऊपर की ओर 22,980-23,000 एक बड़ी बाधा बना हुआ है।
