3 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ग्लोबल संकेतों के बीच BSE Sensex **0.55%** गिरकर **76,152.86** पर बंद हुआ, हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में मजबूती कायम रही।
बाजार की चाल और गिरावट की वजह
3 सितंबर 2026 के कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार पर ग्लोबल इकोनॉमिक फैक्टर्स का भारी दबाव दिखा। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव के कारण निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान कम रहा। BSE Sensex 417.49 अंक फिसलकर 76,152.86 पर आ गया, वहीं NSE Nifty 41 अंक गिरकर 23,873.45 पर थमा।
FIIs और DIIs का एक्शन
बाजार में एक विरोधाभासी स्थिति देखने को मिली। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार बिकवाली जारी रखी, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा देने का काम किया और खरीदारी की।
सेक्टर का हाल
आईटी (IT), एफएमसीजी (FMCG), ऑटो और फार्मा जैसे डिफेंसिव सेक्टर में बिकवाली का जोर रहा। इसके उलट, ब्रॉड मार्केट में तेजी रही और मिडकैप व स्मॉलकैप इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए, जो यह दर्शाता है कि निवेशक अब चुनिंदा ग्रोथ वाले स्टॉक्स पर दांव लगा रहे हैं।
तकनीकी नजरिया (Technical View)
तकनीकी चार्ट पर Nifty को 24,000-24,200 के दायरे में रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ रहा है। निवेशकों के लिए अब 23,800 का लेवल काफी अहम है। अगर बाजार इस सपोर्ट को तोड़ने में नाकाम रहता है, तो निफ्टी 23,600 के स्तर तक फिसल सकता है। फिलहाल बाजार की दिशा क्रूड ऑयल और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड की चाल पर निर्भर करेगी।
