भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन दबाव बना हुआ है। विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है, हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की खरीदारी ने बाजार को बड़े नुकसान से बचा लिया है।
भारतीय शेयर बाजार के लिए 1 अक्टूबर, 2026 का दिन भी चुनौतीपूर्ण रहा। BSE Sensex 0.79% गिरकर 71,909.70 पर, जबकि Nifty 50 0.88% की गिरावट के साथ 22,421.95 के स्तर पर बंद हुआ। यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र है जब बाजार लाल निशान में बंद हुआ है।
FIIs का प्रहार और DIIs का सहारा
बाजार में बिकवाली का मुख्य कारण विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) रहे हैं। FIIs लगातार छठे सत्र में नेट सेलर बने हुए हैं। आज के सत्र में उन्होंने भारतीय बाजारों से ₹9,484 करोड़ की भारी निकासी की। हालांकि, बाजार को एक बड़ा सहारा घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) से मिला, जिन्होंने ₹10,042 करोड़ की खरीदारी करके बाजार को और बड़ी गिरावट से बचा लिया।
ग्लोबल मार्केट का तनाव
बाजार पर ग्लोबल दबाव के पीछे तीन बड़े कारण हैं:
- US Bond Yields: अमेरिका में 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.34% के स्तर पर पहुंच गई है। जब सुरक्षित निवेश पर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो विदेशी निवेशक इमर्जिंग मार्केट्स जैसे भारत से पैसा निकालकर सुरक्षित जगहों पर निवेश करने लगते हैं।
- क्रूड ऑयल: ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। भारत के लिए यह एक बड़ी चिंता है क्योंकि हम अपनी ऊर्जा जरूरतों का अधिकांश हिस्सा आयात करते हैं। इससे न केवल कंपनियों का खर्च बढ़ेगा बल्कि महंगाई का दबाव भी बढ़ेगा।
- रुपया: इन सभी कारणों से भारतीय रुपया अपने दो महीने के निचले स्तर पर आ गया है।
जियो-पॉलिटिकल टेंशन
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने ग्लोबल स्तर पर डर पैदा कर दिया है। अनिश्चितता के दौर में निवेशक रिस्क लेने से बच रहे हैं। आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर भी दबाव पड़ सकता है, क्योंकि बढ़ती लागत का असर सीधा मुनाफे पर दिखेगा। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या घरेलू खरीदारी बाजार को सहारा दे पाएगी या फिर ग्लोबल संकेत बाजार को और नीचे लेकर जाएंगे।
