ग्लोबल संकेतों और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के चलते आज भारतीय शेयर बाजार में गैप-डाउन ओपनिंग के आसार हैं। Nifty 50 पिछले तीन सत्रों से लगातार गिरावट झेल रहा है। हालांकि, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) की खरीदारी ने बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया है।
भारतीय शेयर बाजार आज एक बार फिर कमजोरी के साथ खुलने की तैयारी में है। Nifty 50, जो पिछले सत्र में 22,620 के स्तर पर बंद हुआ था, लगातार 3 दिनों की गिरावट का सामना कर रहा है। बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की तरफ से आ रहा है, जिन्होंने 30 सितंबर को ₹10,000 करोड़ से ज्यादा के शेयर बेचे हैं।
इंस्टीट्यूशनल टग-ऑफ-वॉर (Institutional Tug-of-War)
बाजार में इस समय विदेशी और घरेलू निवेशकों के बीच एक बड़ा मुकाबला चल रहा है। जहां FIIs लगातार बिकवाली कर रहे हैं, वहीं घरेलू निवेशकों (DIIs) ने पिछले सत्र में ₹11,271 करोड़ से अधिक की खरीदारी कर मार्केट को बड़ा क्रैश होने से बचा लिया है। यह घरेलू लिक्विडिटी ही है जो फिलहाल इंडेक्स को थामे हुए है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सपोर्ट आगे भी बना रहेगा?
मैक्रो इकोनॉमिक दबाव (Macroeconomic Headwinds)
ग्लोबल स्तर पर तनाव का असर साफ दिख रहा है। अमेरिका में 10-year Treasury yields का 5.2% के करीब रहना इमर्जिंग मार्केट्स के लिए बुरा संकेत है। वहीं, ब्रेंट क्रूड ऑयल $100 प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जिससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ रहा है। साथ ही, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 96 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है, जो महंगाई और इकोनॉमी के लिए चिंता का विषय है।
तकनीकी संकेत और सपोर्ट लेवल
टेक्निकल तौर पर Nifty का RSI अब 20s के मिड-लेवल में पहुंच गया है, जो ओवरसोल्ड स्थिति को दर्शाता है। आमतौर पर इतनी गिरावट के बाद एक टेक्निकल बाउंस देखने को मिल सकता है, लेकिन ट्रेंड अभी भी कमजोर है। निवेशकों को 22,550 से 22,600 के सपोर्ट जोन पर नजर रखनी चाहिए। अगर इंडेक्स इसके नीचे फिसलता है, तो 22,300 से 22,400 का अगला सपोर्ट लेवल टेस्ट हो सकता है।
